स्टील्थ जेट, S-400 और किल चेन: भारत-पाक एयर वॉर में कौन किस पर भारी?
पाकिस्तान की ओर से चीन से पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट J-35A खरीदने की खबरों ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा समीकरणों को फिर से चर्चा में ला दिया है। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह सौदा पूरा होता है तो पाकिस्तान की वायुसेना एक नए “स्टैंड-ऑफ और किल चेन” आधारित युद्ध मॉडल की ओर बढ़ सकती है, जिसमें लंबी दूरी से लक्ष्य पर हमला करने की क्षमता प्रमुख होगी।
जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी सीमित भौगोलिक गहराई के कारण पारंपरिक रक्षा रणनीति से हटकर अब “दूर से वार और अंदर ही अंदर सुरक्षा” की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी रणनीति के तहत J-35A स्टील्थ जेट और चीन की PL-17 जैसी लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को गेम-चेंजर माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, J-35A को इस तरह इस्तेमाल किया जाएगा कि वह पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के भीतर रहते हुए ही भारतीय विमानों को ट्रैक और टारगेट कर सके। इसमें स्टील्थ तकनीक के कारण रडार पर कम दिखाई देने की क्षमता इसे और खतरनाक बनाती है। वहीं PL-17 मिसाइल की मारक क्षमता 300 से 400 किलोमीटर तक बताई जा रही है, जिससे यह सीमा से काफी दूर स्थित लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है।
इसके साथ ही चीन का सैटेलाइट आधारित नेटवर्क पाकिस्तान को एक “किल चेन सिस्टम” बनाने में मदद कर सकता है, जिसमें रडार, सैटेलाइट और डेटा लिंक के जरिए लक्ष्य की पहचान कर तुरंत हमला किया जा सकेगा। इस मॉडल में अपने मुख्य रडार बंद रखकर भी दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, जिससे जवाबी कार्रवाई से बचने की कोशिश की जाती है।
भारत की ओर देखें तो विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय वायुसेना पहले से ही मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें S-400 Triumf, स्वदेशी AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस शामिल हैं। S-400 को लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम माना जाता है, लेकिन स्टील्थ विमानों को पहचानना अब भी एक बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का फोकस अब “काउंटर-स्टील्थ रडार नेटवर्क” विकसित करने पर है, जो कम फ्रीक्वेंसी और एडवांस सेंसर तकनीक के जरिए स्टील्थ विमानों को भी ट्रैक कर सके। साथ ही इसे मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस ग्रिड से जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है।
रूसी Su-57 और मानव रहित ड्रोन सिस्टम को लेकर भी चर्चा है कि भविष्य में भारत “मैन-ड्रोन टीमिंग” मॉडल अपना सकता है, जिसमें फाइटर जेट के साथ AI-संचालित ड्रोन दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम को पहले ही जाम या नष्ट कर दें।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य का युद्ध अब पारंपरिक डॉगफाइट नहीं बल्कि “डेटा-ड्रिवन नेटवर्क वॉर” होगा, जिसमें सेंसर, सैटेलाइट, AI और मिसाइल सिस्टम एक साथ काम करेंगे।
कुल मिलाकर पाकिस्तान की रणनीति भारत को उसकी सीमाओं से दूर रोकने और पहले ही हमले की क्षमता विकसित करने की है, जबकि भारत का जवाब एक इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस और ऑफेंसिव नेटवर्क बनाने पर केंद्रित है, जो किसी भी “किल चेन” को तोड़ने में सक्षम हो सके।
