May 10, 2026

Pakistan US Relations: ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता’, पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बड़ा बयान

0
10-46-1778412592


नई दिल्ली। अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में हाल के महीनों में भले ही नरमी और नजदीकी देखने को मिली हो, लेकिन भरोसे को लेकर सवाल अब भी कायम हैं। इसी बीच पेंटागन के पूर्व अधिकारी और मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ Michael Rubin ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करना चाहिए और भविष्य में इस्लामाबाद से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए वॉशिंगटन बाध्य नहीं होगा।

माइकल रुबिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश नीति में पाकिस्तान को कभी स्थायी सहयोगी के रूप में नहीं देखा गया। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन ने हमेशा पाकिस्तान को केवल रणनीतिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया और मौजूदा नेतृत्व भी उसी नीति का हिस्सा है।

रुबिन ने कहा कि Donald Trump प्रशासन का कार्यकाल खत्म होने के बाद चाहे रिपब्लिकन सरकार आए या डेमोक्रेट, दोनों इस बात पर सहमत होंगे कि पाकिस्तान पूरी तरह भरोसेमंद साझेदार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पाक सेना प्रमुख Asim Munir से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए खुद को मजबूर महसूस नहीं करेगा।

दरअसल, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में बदलाव देखने को मिला है। ट्रंप कई मौकों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ असीम मुनीर की तारीफ कर चुके हैं। इतना ही नहीं, ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और वार्ता में भी अमेरिका ने पाकिस्तान की भूमिका को अहम बताया है।

हालांकि, पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अमेरिका को शक था कि आतंकी संगठन अल-कायदा सरगना Osama bin Laden को पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है। इसके बाद साल 2011 में अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के एबटाबाद में ऑपरेशन चलाकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे।

स्थिति यह रही कि साल 2006 के बाद से किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया। वहीं 2011 के बाद लंबे समय तक अमेरिका के बड़े अधिकारी भी इस्लामाबाद जाने से बचते रहे। हालांकि हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने ईरान वार्ता के सिलसिले में पाकिस्तान का दौरा किया, जिसे दोनों देशों के बीच नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *