तेल संकट से घिरा पाकिस्तान, मंत्री ने की भारत की तारीफ, बोले- वह हमसे काफी आगे..
मलिक के अनुसार, पाकिस्तान के पास कच्चे तेल का भंडार बेहद सीमित है, जो केवल कुछ दिनों की जरूरत ही पूरी कर सकता है। इसके विपरीत, भारत के पास लगभग 60-70 दिनों का संयुक्त रणनीतिक और वाणिज्यिक तेल भंडार मौजूद है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित जहाजरानी के चलते हालात और चुनौतीपूर्ण हो गए हैं, जिसका असर पाकिस्तान पर ज्यादा पड़ रहा है।
राहत के लिए करनी पड़ी गुप्त बातचीत
पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि आम लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) जैसे संस्थानों से गोपनीय स्तर पर बातचीत करनी पड़ी। बजट समझौतों के तहत देश को राजकोषीय घाटा कम करने के लिए ईंधन पर भारी कर लगाने पड़े। डीजल की कीमतों में 3-4 गुना वृद्धि के कारण पेट्रोल पर अतिरिक्त बोझ डालना पड़ा, वहीं मोटरसाइकिल चालकों को सब्सिडी देने से वित्तीय दबाव और बढ़ गया।
ऊर्जा संकट से बढ़ी जनता की नाराजगी
देश में ऊर्जा संकट के चलते व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा पेट्रोल की कीमत में 80 पाकिस्तानी रुपये की कटौती कर इसे 378 रुपये प्रति लीटर करने के बावजूद, इससे पहले हुई 42.7% की वृद्धि ने कीमत को 321.17 रुपये से बढ़ाकर 458.41 रुपये तक पहुंचा दिया था। इससे देशभर में विरोध प्रदर्शन और ईंधन की कमी की स्थिति पैदा हो गई।
भारत से तुलना पर बोले मंत्री
मलिक ने साफ तौर पर कहा कि भारत इस मामले में पाकिस्तान से काफी आगे है। उन्होंने कहा कि भारत के पास 60-70 दिनों का तेल भंडार है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत उपयोग में लाया जा सकता है, जबकि पाकिस्तान के पास एक दिन का भी पर्याप्त पेट्रोल भंडार नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति और बेहतर रणनीतिक योजना उसे ऐसे संकटों से निपटने में सक्षम बनाती है।
आईएमएफ पर निर्भरता बनी चुनौती
मलिक ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति आईएमएफ पर निर्भर है, जबकि भारत इस तरह के किसी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। भारत ने तेल की कीमतों में वृद्धि के दौरान करों में कमी कर स्थिति को नियंत्रित किया, जबकि पाकिस्तान के पास ऐसा करने की वित्तीय स्वतंत्रता नहीं है।
एक इंटरव्यू में मलिक ने बताया कि पाकिस्तान के पास केवल वाणिज्यिक तेल भंडार हैं। कच्चा तेल अधिकतम 5-7 दिन ही चल सकता है, जबकि रिफाइंड उत्पादों का स्टॉक करीब 20-21 दिनों का है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात और बिगड़े, तो देश की ऊर्जा व्यवस्था पर गंभीर संकट आ सकता है।
