October 22, 2026

सिंधु जल संधि पर फिर भड़का पाकिस्तान, ‘बोला-भारत पानी को हथियार बना रहा

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इस्लामाबाद।
सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भारत पर पानी को ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लेकर अपने रुख पर कायम है और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहेगा। तरार ने यह भी दावा किया कि संधि को भारत एकतरफा तरीके से बदल, रद्द या स्थगित नहीं कर सकता।

तरार ने बुधवार को इस्लामाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज में सिंधु जल संधि पर एक रिपोर्ट जारी करने के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांतिप्रिय देश है, लेकिन वह भारत को पानी को हथियार बनाने की अनुमति नहीं दे सकता, क्योंकि उनके मुताबिक सिंधु का पानी पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों का बुनियादी अधिकार है।

‘संधि को एकतरफा नहीं रोका जा सकता’

अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच एक कानूनी समझौता है और उनके अनुसार यह दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी है। उन्होंने दावा किया कि विवाद होने की स्थिति में भी दोनों देशों को संधि में तय शर्तों और विवाद समाधान की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि अगर कोई देश स्थापित विवाद समाधान तंत्र के बावजूद किसी बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय जल संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित कर सकता है, तो इसका असर दुनिया में सीमा-पार जल प्रबंधन की व्यवस्था पर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत जारी रखेगा और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कानूनी तथा कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल करेगा।

PCA के फैसले का भी दिया हवाला

तरार ने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के अगस्त 2026 के फैसले का हवाला देते हुए दावा किया कि इससे पाकिस्तान के इस रुख को मजबूती मिली है कि संधि की स्थिति को एकतरफा कार्रवाई से नहीं बदला जा सकता।

हालांकि, PCA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि की स्थिति और रतले जलविद्युत परियोजना से संबंधित अंतरिम उपायों पर फैसला जारी किया था। PCA की वेबसाइट पर संबंधित मामले में फैसलों की सूची भी उपलब्ध है।

शहबाज शरीफ के UN भाषण का जिक्र

तरार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शरीफ ने सिंधु के पानी को पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए ‘जीवनरेखा’ बताया था।

तरार के मुताबिक, पाकिस्तान का सिंधु जल संधि पर रुख पूरी तरह स्पष्ट है और वह इसे क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता का माध्यम मानता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मामले में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और दूसरे देशों के साथ संपर्क बनाए रखेगा।

1960 में हुई थी सिंधु जल संधि

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर सितंबर 1960 में हस्ताक्षर हुए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुए इस समझौते में सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के जल के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार और दायित्व तय किए गए थे।

मौजूदा विवाद में दोनों देशों के रुख अलग हैं। पाकिस्तान संधि को बाध्यकारी बताते हुए इसके प्रावधानों को जारी रखने की मांग कर रहा है, जबकि भारत ने संधि को लेकर अपनी अलग स्थिति अपनाई है। PCA के आधिकारिक रिकॉर्ड में 31 अगस्त 2026 को ‘संधि की स्थिति’ पर अवॉर्ड दर्ज है और संबंधित मध्यस्थता मामला फिलहाल PCA के रिकॉर्ड में लंबित मामलों में शामिल है।

इस बीच अताउल्लाह तरार ने कहा कि पाकिस्तान अपने कानूनी और कूटनीतिक पक्ष को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखता रहेगा। उन्होंने सीमा-पार जल समझौतों पर इस विवाद के संभावित व्यापक प्रभावों का भी मुद्दा उठाया।

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