रूस से तेल आपूर्ति जारी रहेगी, पर प्राइवेट रिफाइनरी होंगी प्रभावित
– प्रतिबंध: रिलायंस-नायरा एनर्जी को झटका, रूसी तेल खरीद पर कोई सरकारी निर्देश नहीं, रिफाइनरी खुद लागत का आकलन कर रहे

अमरीका की ओर से 21 नवंबर से रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर कड़े प्रतिबंध लगाने का भारत पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं दिखेगा। सरकारी तेल कंपनियों को बिचौलियों के माध्यम से रूसी तेल की आपूर्ति जारी रहेगी। हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी निजी रिफाइनरियां प्रभावित होंगी और इन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे भारत के कच्चे तेल आयात का बिल 2.7 अरब डॉलर बढ़ सकता है। भारत ने 2024-25 में कुल 137 अरब डॉलर का क्रूड ऑयल आयात किया। अमरीकी प्रतिबंधों से कच्चा तेल महंगा होने के कारण भारत को हर साल 2.7 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। भारत अभी रूस से 2-4 डॉलर प्रति बैरल डिस्काउंट पर तेल खरीद रहा है।
सरकार ने नहीं दिए निर्देश: भारत सरकार ने तेल रिफाइनरियों को रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने का कोई निर्देश नहीं दिया है। इस संबंध में कोई भी कटौती पूरी तरह कंपनियों के विवेक पर निर्भर है। यह निर्णय वे कीमतों और अन्य कारकों के आधार पर ले रही हैं। मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, सरकार ने रिफाइनरियों से रूसी तेल की खरीद घटाने के लिए नहीं कहा है।
सरकारी कंपनियों पर सीमित असर
रिलायंस ने इस महीने स्पॉट मार्केट से कम से कम 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इसमें से अधिकांश मिडिल ईस्ट से खरीदा गया है और ज्यादातर तेल अमरीकी प्रतिबंधों के बाद खरीदा गया है। प्रभावित होने वाली दूसरी कंपनी नायरा एनर्जी है। कंपनी में रोसनेफ्ट की 49.13त्न हिस्सेदारी है, जुलाई में ईयू की ओर से बैन लगाए जाने के बाद से पूरी तरह रूसी तेल की आपूर्ति पर निर्भर है। भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जोखिम का मूल्यांकन शुरू कर दिया है
रिलायंस के लिए रूस की टंकी बंद!
रिलायंस रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीदार है। कंपनी को आयात फिर से संतुलित करना पड़ रहा है, क्योंकि वह सीधे रूस की ‘रोसनेफ्ट’ से कच्चा तेल खरीदती है। सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस ने रूस से आयात को कम करने की योजना बनाई है। कंपनी ने सऊदी अरब के खफजी, इराक के बसरा मीडियम और कतर के अल-शहीन जैसे कई ग्रेड के कच्चे तेल खरीदे हैं। इसके अलावा कंपनी ने अमरीका से डब्ल्यूटीआइ क्रूड भी खरीदा है। रिलायंस के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी यूरोप को रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट के निर्यात पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के अनुपालन से जुड़ी जरूरतों का आकलन कर रही है। नियमों के मुताबिक ही यूरोप में निर्यात करेगी। जैसे ही भारत सरकार इस संबंध में कोई मार्गदर्शन जारी करेगी, कंपनी उसका पूरी तरह से पालन करेगी।
