May 25, 2026

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश

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नई दिल्ली(New Delhi)।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं, जहां उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की गई।

बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सहयोग और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिनके हित कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल पारंपरिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सहयोग में जुड़े हुए देश हैं, जो वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच नियमित संवाद इस साझेदारी को और मजबूत बनाता है।

वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संपर्क और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।

रूबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा है और वे इस संबंध को और गहराई से समझना चाहते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक स्तर पर सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बताया, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में प्रभाव डालता है।

इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा जारी रही। रूबियो सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे, जबकि मंगलवार को वे नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भाग लेंगे।

यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने और वैश्विक कूटनीति में दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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