मध्य पूर्व संघर्ष में 1100 से ज्यादा बच्चे बने निशाना, यूनिसेफ ने कूटनीति और बातचीत से हल निकालने की अपील की
यूनिसेफ ने बच्चों को निशाना बनाने और उनकी निर्भरता पर हमलों की कड़ी निंदा की। संगठन ने बताया कि पढ़ाई में बड़े पैमाने पर बाधा उत्पन्न होने के कारण लाखों बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जबकि लगातार बमबारी और हमलों से लाखों बच्चे बेघर हो चुके हैं। सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें हॉस्पिटल, स्कूल और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं, को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है या नष्ट कर दिया गया है। बच्चों को मारना या उनके जीवन और शिक्षा के आधारभूत साधनों को नुकसान पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
यूनिसेफ ने कहा कि हथियारों से होने वाली लड़ाई में बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जा सकता है। संगठन ने सभी संघर्षरत पक्षों से अपील की है कि वे लड़ाई के तरीके और साधनों का चुनाव करते समय बच्चों और आम नागरिकों को न्यूनतम जोखिम में रखें। खासकर ऐसे विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल करने से बचें जिनका असर बच्चों पर अधिक होता है।
यूनिसेफ ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के नेतृत्व में सभी पक्षों से संघर्ष रोकने और कूटनीतिक बातचीत में शामिल होने की पुरजोर अपील की। संगठन ने चेताया कि इस इलाके के लगभग 20 करोड़ बच्चे दुनिया से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
यूनिसेफ का यह बयान वैश्विक समुदाय को याद दिलाता है कि युद्ध केवल सैन्य या राजनीतिक संकट नहीं है, बल्कि इसमें सबसे संवेदनशील वर्ग बच्चे भी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। संगठन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके बुनियादी अधिकारों की रक्षा के बिना इस संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी सेवाओं को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। यूनिसेफ ने सभी पक्षों से कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवता की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि बच्चों और आम नागरिकों के जीवन को बचाया जा सके। यूनिसेफ का यह आंकड़ा और चेतावनी वैश्विक समुदाय के लिए गंभीर संदेश है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष में मानवीय राहत और कूटनीतिक प्रयासों को सबसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
