July 6, 2026

लंदन में PoK को लेकर जोरदार प्रदर्शन, पाकिस्तान हाई कमीशन तक निकाला मार्च; गिरफ्तारियों के विरोध में गूंजे आजादी के नारे

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नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देने लगी है। लंदन में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान के खिलाफ विरोध मार्च निकाला और पाकिस्तान हाई कमीशन तक पहुंचकर अपनी मांगों को जोरदार ढंग से उठाया। प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में चल रहे आंदोलन के समर्थन में नारे लगाए गए और हालिया गिरफ्तारियों पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई।

प्रदर्शनकारियों ने पार्लियामेंट स्क्वायर से पाकिस्तान हाई कमीशन तक मार्च किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने रैली में भाग लेते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों पर कार्रवाई और आंदोलन से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत है।

विरोध मार्च में शामिल लोगों ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख शौकत नवाज मीर और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आंदोलन से जुड़े सभी नेताओं को जल्द रिहा किया जाए और स्थानीय नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दबाने के प्रयासों से लोगों में असंतोष और बढ़ रहा है।

आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने दावा किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई जा रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों को लेकर व्यापक असंतोष मौजूद है, जिसे अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान भविष्य में आंदोलन को और तेज करने के संकेत भी दिए गए।

जम्मू-कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायंस के चेयरमैन महमूद कश्मीरी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि विभिन्न देशों में रह रहे कश्मीरी समुदाय के लोग भी इस अभियान में अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य अपने मुद्दों को वैश्विक समुदाय के सामने रखना है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रतिभागियों ने नियंत्रण रेखा से जुड़े मुद्दों और क्षेत्र में मानवीय परिस्थितियों पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि स्थानीय लोगों की समस्याओं का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान तलाशा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में नागरिक अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में आयोजित ऐसे प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे अब प्रवासी समुदायों के बीच भी चर्चा का विषय बन रहे हैं। हालांकि इन दावों और आरोपों पर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दृष्टिकोण हैं। ऐसे में क्षेत्र की स्थिति और उससे जुड़े घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार नजर बनी हुई है।

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