दक्षिणी लेबनान में गहराया जल संकट, 7 लाख से अधिक लोग स्वच्छ पेयजल से वंचित; UN ने जताई गंभीर चिंता
दक्षिणी लेबनान में संघर्ष के कारण बुनियादी ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि जल आपूर्ति प्रणाली के क्षतिग्रस्त होने से लाखों लोगों के सामने स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। संघर्ष प्रभावित इलाकों में लौट रहे विस्थापित परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) के अनुसार, दक्षिण लेबनान जल प्राधिकरण द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन में सामने आया है कि दक्षिण और नबातियेह गवर्नरेट्स में जल आपूर्ति प्रणाली को हुए व्यापक नुकसान के कारण 7 लाख से अधिक लोगों की सुरक्षित पेयजल तक पहुंच बाधित हो गई है।
यूएन का कहना है कि तालाबों, पंपिंग स्टेशनों, बोरहोल और अन्य जल सुविधाओं को हुए नुकसान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसके कारण न केवल पीने के पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ गया है। कृषि गतिविधियां बाधित होने से हजारों परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, संघर्ष के बाद अब तक 8.21 लाख से अधिक लोग अपने घरों और समुदायों में लौट चुके हैं, लेकिन करीब 3.60 लाख लोग अब भी विस्थापित हैं। इनमें लगभग 27 हजार लोग सामूहिक राहत शिविरों में रह रहे हैं और उन्हें भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है।
मानवीय एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि लोगों का अपने घर लौट आना इस बात का संकेत नहीं है कि उनकी समस्याएं समाप्त हो गई हैं। बड़ी संख्या में घर क्षतिग्रस्त हैं, जल और बिजली जैसी बुनियादी सेवाएं पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी हैं और कई क्षेत्रों में आजीविका के साधन भी प्रभावित हुए हैं। ऐसे में राहत और पुनर्वास कार्यों में निरंतर निवेश की आवश्यकता है, ताकि प्रभावित समुदाय सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने भी लेबनान में आम नागरिकों की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बेरूत में अपने दौरे के समापन पर कहा कि संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं और इनमें से कुछ मामलों को युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।
टर्क के अनुसार, घनी आबादी वाले इलाकों में लगातार हवाई हमलों, गोलाबारी और विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौत हुई है, हजारों लोग घायल हुए हैं और व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि एक स्वतंत्र आकलन मिशन कथित उल्लंघनों से जुड़े साक्ष्य और जानकारियां एकत्र कर रहा है।
लेबनानी अधिकारियों के हवाले से संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि 2 मार्च से शुरू हुए संघर्ष में 4,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मृतकों में 135 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी तथा कई पत्रकार और मीडिया कर्मी भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता, जल आपूर्ति व्यवस्था की बहाली और पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि लाखों लोगों को सुरक्षित पेयजल और आवश्यक सेवाएं दोबारा उपलब्ध कराई जा सकें।
