वॉशिंगटन में हाई लेवल बैठक इजरायल और अमेरिका ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बढ़ाए कदम
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ भी अलग अलग मुलाकात की। इन बैठकों में पश्चिम एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति ईरान की गतिविधियों लेबनान से जुड़े हालात और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर विचार विमर्श किया गया। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने तथा साझा सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि इजरायल के साथ अमेरिका की रक्षा साझेदारी बेहद मजबूत है और दोनों देश साझा सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए लगातार साथ काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी टीम के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया और भविष्य की रणनीतिक योजनाओं पर सकारात्मक चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित 16 अरब डॉलर का संयुक्त रक्षा फंड नई पीढ़ी की रक्षा प्रणालियों मिसाइल तकनीक और उन्नत सैन्य अनुसंधान को गति देने के उद्देश्य से तैयार किया जा सकता है। यदि इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है तो यह अमेरिका और इजरायल के रक्षा सहयोग के इतिहास में सबसे बड़े संयुक्त निवेशों में शामिल होगा।
बैठक के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर भी गंभीर चर्चा हुई। बताया गया कि नेतन्याहू ने अमेरिकी पक्ष को कुछ खुफिया जानकारियों से अवगत कराया जिनका संबंध कथित तौर पर ईरान की भूमिगत परमाणु गतिविधियों से है। हालांकि इस विषय पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के नेताओं के बीच अब्राहम समझौते को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों पर भी बातचीत हुई। अमेरिका क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना चाहता है जबकि इजरायल सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सख्त रुख बनाए हुए है। इसके बावजूद दोनों देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करने तथा साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान निकालने की इच्छा व्यक्त की।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है बल्कि पश्चिम एशिया की बदलती भू राजनीतिक परिस्थितियों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त रणनीति को भी नई दिशा दे सकती है। आने वाले समय में इस प्रस्तावित रक्षा फंड और सुरक्षा सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं जो वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर भी असर डाल सकते हैं।
