May 13, 2026

ईरान का कड़ा रुख: नाकेबंदी खत्म करो, फ्रीज संपत्तियां लौटाओ, वरना बढ़ेगा तनाव

0
12-3-1778567210


नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही चर्चाओं और तनावों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय के अनुसार तेहरान की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव में कई ऐसे मुद्दों को शामिल किया गया है जो सीधे क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। इस प्रस्ताव में सबसे प्रमुख मांग यह रखी गई है कि अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत समाप्त किया जाए। ईरान का कहना है कि यह नाकेबंदी न केवल उसके आर्थिक हितों को प्रभावित कर रही है बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।

इसके साथ ही ईरान ने यह भी मांग की है कि पूरे क्षेत्र में चल रहे सैन्य अभियानों पर रोक लगाई जाए। खासतौर पर उन गतिविधियों का उल्लेख किया गया है जिनमें लेबनान में सक्रिय हिजबुल्ला को निशाना बनाते हुए इजरायली हमले शामिल हैं। ईरान का तर्क है कि इस प्रकार की सैन्य कार्रवाइयां तनाव को और बढ़ाती हैं और क्षेत्र को अस्थिरता की ओर धकेलती हैं। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति और सुरक्षा के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहिए।

इसके अलावा ईरान ने उन सभी संपत्तियों को वापस जारी करने की भी मांग की है जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण विदेशों में फ्रीज कर दी गई हैं। ईरान का कहना है कि ये संपत्तियां उसके वैध आर्थिक संसाधन हैं और इन पर लगाए गए प्रतिबंध अनुचित हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन संपत्तियों को रोककर रखना न केवल आर्थिक अन्याय है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की भावना के भी खिलाफ है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने इस पूरे मुद्दे पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान ने किसी भी प्रकार की रियायत या विशेष सुविधा की मांग नहीं की है। उनके अनुसार ईरान केवल अपने उन अधिकारों की मांग कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वैध माने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हमेशा बातचीत और कूटनीति के पक्ष में रहा है, लेकिन उसके मूल अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा।

इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव की स्थिति चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ती है तो क्षेत्रीय राजनीति में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन यदि गतिरोध बना रहता है तो तनाव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *