Iran–Israel युद्ध में अमेरिका के कूदने से बढ़े कच्चे तेल के दाम, 81 डॉलर प्रति बैरल के पार
नई दिल्ली। ईरान-इजरायल युद्ध (Iran–Israel War) में अमेरिका (America) के कूदने के बाद इसके तेज होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में आग लगी है। कच्चा तेल (Crude oil) अब 81 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसके बावजूद भारत के लोगों के लिए राहत है। क्योंकि, यहां पेट्रोल-डीजल के रेट (Petrol and diesel rates) में आज भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। नई दिल्ली में पेट्रोल 94.77 और डीजल 87.67 रुपये लीटर बिक रहा है।
सोमवार को तेल की कीमतें जनवरी के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई पहले सत्र में 3% से अधिक की वृद्धि हुई और वे क्रमशः $81.40 और $78.40 पर पहुंच गए, जो पांच महीने के उच्चतम स्तर को छू गए। हालांकि, यह तेजी अधिक देर तक नहीं टिक पाई।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक ब्रेंट क्रूड का अगस्त का वायदा भाव 2.61 पर्सेंट उछलकर 79.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। जबकि, डब्ल्यूटीआई के रेट में भी 2.75 पर्सेंट का विस्फोट हुआ है। यह 75.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
कच्चे तेल के मोर्चे पर भारत की स्थिति अच्छी
ईरान के तीन मुख्य परमाणु केंद्रों पर अमेरिकी हमलों ने एक बार फिर इस बात को लेकर चिंता बढ़ा दी है कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है। भारत के कुल तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल के मोर्चे पर भारत की स्थिति अभी अच्छी बनी हुई है।
विश्लेषकों ने कहा कि रूस से लेकर अमेरिका और ब्राजील तक, वैकल्पिक स्रोत किसी भी कमी को पूरा करने के लिए आसानी से उपलब्ध हैं। रूसी तेल को होर्मुज जलडमरूमध्य से अलग रखा गया है, जो स्वेज नहर, केप ऑफ गुड होप या प्रशांत महासागर से होकर आता है। दूसरी तरफ अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लातिनी अमेरिका से भी तेल मंगाया जा सकता है, हालांकि यह थोड़ा महंगा होगा।
कतर, भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है और वह होर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग नहीं करता है। ऑस्ट्रेलिया, रूस और अमेरिका में भारत के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के अन्य स्रोत पर भी कोई असर नहीं होगा। हालांकि, विश्लेषकों ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने का असर निकट अवधि में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा और कीमतें 80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं।
रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया
इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद बाजार में आए उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने जून में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियां जून में रूस से प्रतिदिन 20 से 22 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रही हैं। यह दो साल का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।
इसके साथ ही यह इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत से खरीदी गई कुल मात्रा से अधिक है। मई में रूस से भारत का तेल आयात 19.6 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) था।वहीं, जून में अमेरिका से भी तेल आयात बढ़कर 4,39,000 बीपीडी हो गया। पिछले महीने यह आंकड़ा 2,80,000 बीपीडी था।
