May 13, 2026

म्यांमार के खनिजों पर चीन की पकड़ से बढ़ी भारत की चिंता, गृहयुद्ध में बदला भू-राजनीतिक खेल

0
11-8-1778482763



नई दिल्ली। म्यांमार 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से लगातार गृहयुद्ध जैसी स्थिति में फंसा हुआ है, जहां सेना और विभिन्न जातीय सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष जारी है। इस अस्थिर माहौल के बीच देश के रणनीतिक खनिज संसाधनों, खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर चीन की बढ़ती भूमिका ने क्षेत्रीय भू-राजनीति को और जटिल बना दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, म्यांमार के उत्तरी राज्यों जैसे कचीन और शान में स्थित खनिज क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में रेयर अर्थ तत्वों का उत्पादन होता है, जिनका वैश्विक सप्लाई चेन में अहम स्थान है। इन खनिजों का बड़ा हिस्सा चीन को निर्यात होता है, क्योंकि चीन दुनिया में रेयर अर्थ प्रोसेसिंग का सबसे बड़ा केंद्र है।

विश्लेषकों का मानना है कि चीन इस क्षेत्र में सिर्फ आर्थिक निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्थानीय सशस्त्र समूहों और सीमावर्ती नेटवर्क के जरिए अपनी रणनीतिक पकड़ भी बनाए हुए है। इससे म्यांमार के भीतर संघर्ष और अधिक गहरा हुआ है और सीमावर्ती इलाकों में अस्थिरता बनी हुई है।

भारत के लिए यह स्थिति इसलिए संवेदनशील है क्योंकि म्यांमार की करीब 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश से लगती है। इस क्षेत्र में पहले से ही उग्रवाद और तस्करी की चुनौतियां रही हैं, जो अब और जटिल हो गई हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, म्यांमार की अस्थिरता और चीन की सक्रिय मौजूदगी भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं जैसे त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान मल्टीमॉडल प्रोजेक्ट पर भी असर डाल रही है।

कुल मिलाकर, म्यांमार का संकट अब केवल आंतरिक गृहयुद्ध नहीं रह गया है, बल्कि यह एक व्यापक क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन और संसाधन प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन चुका है, जिसमें भारत, चीन और स्थानीय समूहों के हित सीधे जुड़े हुए हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *