अमेरिका की नई रणनीति में भारत अहम केंद्र, चीन के सूचना अभियान का मुकाबला करने के लिए सोशल मीडिया डिप्लोमेसी पर बढ़ेगा जोर
अमेरिकी एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया (यूएसएजीएम) का नेतृत्व करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नामित सारा रोजर्स ने सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी के सामने अपनी रणनीति को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एशिया अमेरिका की प्राथमिकताओं में प्रमुख क्षेत्र होगा, क्योंकि चीन समेत कई देशों द्वारा चलाए जा रहे सूचना अभियानों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
रोजर्स ने कहा कि अमेरिका को बदलते मीडिया इस्तेमाल के तरीकों के अनुसार अपनी अंतरराष्ट्रीय संचार नीति को आधुनिक बनाना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि अब केवल रेडियो और टेलीविजन प्रसारण पर निर्भर रहने के बजाय सोशल मीडिया, छोटे वीडियो, पॉडकास्ट और डिजिटल कम्युनिटी के माध्यम से लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने की जरूरत है।
उन्होंने भारत और जापान जैसे देशों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों के बीच संवाद का एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं। इसी वजह से अमेरिका अपनी डिजिटल रणनीति के तहत इन क्षेत्रों में अधिक सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की योजना बना रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि सूचना का क्षेत्र अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। चीन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि मजबूत करने और अपने विचारों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे में अमेरिका भी अपनी पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लेना चाहता है।
रोजर्स ने कहा कि यूएसएजीएम की प्राथमिकताओं में एजेंसी को अधिक प्रभावी बनाना, नेतृत्व को मजबूत करना और उसकी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाना शामिल होगा। इसके अलावा उन्होंने रिसर्च क्षमता को बेहतर करने पर भी जोर दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमेरिकी संदेश कितने लोगों तक पहुंच रहे हैं और उनका प्रभाव कितना है।
नई रणनीति के तहत अमेरिका उन देशों और क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहता है जहां स्वतंत्र जानकारी तक लोगों की पहुंच सीमित है। एशिया के अलावा मध्य पूर्व, ईरान, अफगानिस्तान और क्यूबा जैसे क्षेत्रों को भी अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय प्रसारण रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत का महत्व अमेरिका के लिए केवल आर्थिक और रक्षा संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सूचना और डिजिटल प्रभाव के क्षेत्र में भी बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने के साथ ही डिजिटल संवाद और सार्वजनिक कूटनीति के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं।
यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा व्यापार, तकनीक और सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक सूचना व्यवस्था के क्षेत्र में भी बढ़ रही है। अमेरिका की नई रणनीति का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के जरिए अपनी पहुंच को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रभाव को बनाए रखना है।
