March 8, 2026

तुर्की में बढ़ते सिंकहोल: गेहूं की ज्यादा उपज और घटते भूजल ने खोखली की जमीन

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नई दिल्ली / तुर्की का कोन्या मैदान जिसे देश का ‘अन्न भंडार’ कहा जाता है इन दिनों एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। यह इलाका गेहूं और अन्य अनाज के उत्पादन में तुर्की का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है लेकिन अत्यधिक फसल उत्पादन और भूजल का अत्यधिक उपयोग जमीन के लिए खतरा बन गया है। तुर्की आपदा प्रबंधन एजेंसी AFAD की नई रिपोर्ट के अनुसार अब तक 684 सिंकहोल की पहचान हुई है। कोन्या तकनीकी विश्वविद्यालय के अनुसार 2017 में यहां केवल 299 सिंकहोल थे जो 2021 तक बढ़कर 2550 हो गए। साल 2025 में करीब 20 नए बड़े गड्ढे बन चुके हैं जिनकी गहराई 30 मीटर और चौड़ाई 100 फीट तक है।

संकट के मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार सिंकहोल की समस्या मानवजनित गतिविधियों और प्राकृतिक कारणों का मिश्रण है।भूवैज्ञानिक संरचना: कोन्या मैदान ‘कार्स्ट’ संरचना वाला इलाका है। यह घुलनशील चट्टानों जैसे कार्बोनेट और जिप्सम से बना है। पानी के प्रभाव से ये चट्टानें धीरे-धीरे घुलती हैं और सिंकहोल बनाती हैं। बारिश में कमी: पिछले 15 सालों में क्षेत्र में वर्षा की मात्रा काफी घट गई है। जलवायु परिवर्तन के चलते भूजल पुनर्भरण धीमा हो गया है जिससे जमीन कमजोर हो रही है। ग्राउंड वाटर का अत्यधिक दोहन: चुकंदर मक्का और अन्य पानी-गहन फसलों की सिंचाई के लिए हजारों वैध और अवैध कुएं उपयोग में हैं। कुछ इलाकों में ग्राउंड वाटर स्तर 60 मीटर तक गिर चुका है। इससे जमीन का सहारा कम होता है और अचानक धसाव आता है।

प्रशासन और बचाव प्रयास

AFAD ने 1850 क्षेत्रों में संभावित धसाव के संकेत पाए हैं। सरकार अवैध कुओं पर रोक लगा रही है और बेहतर जल प्रबंधन की दिशा में कदम उठा रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ग्राउंड वाटर दोहन और अधिक हुआ तो सिंकहोल की संख्या तेजी से बढ़ सकती है और पड़ोसी क्षेत्र भी प्रभावित हो सकते हैं।

कृषि और आर्थिक प्रभाव
कोन्या मैदान तुर्की का प्रमुख अनाज उत्पादन केंद्र है। सिंकहोल के कारण किसानों के हजारों हेक्टेयर खेत बर्बाद हो रहे हैं जिससे अनाज उत्पादन घट सकता है। यह कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।

सामाजिक और पर्यावरणीय असर

सिंकहोल न केवल खेती प्रभावित कर रहे हैं बल्कि ग्रामीण आबादी के पलायन को भी बढ़ावा दे रहे हैं। भूजल की कमी जैव विविधता पर भी असर डाल रही है। इससे शहरीकरण और सामाजिक असंतुलन की समस्याएं बढ़ सकती हैं।विशेषज्ञों का निष्कर्ष: यदि वर्तमान स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो तुर्की में सिंकहोल की समस्या और गंभीर होगी। सतत जल प्रबंधन और निगरानी ही इस संकट से बचाव का रास्ता है।

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