August 6, 2026

विदेशी फंडिंग पर दुनिया भर में सख्ती, जानिए भारत के FCRA और अमेरिका-यूरोप के कानूनों में क्या है अंतर

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नई दिल्ली। देश में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम 2026 यानी एफसीआरए को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। संसद में पेश किए गए इस विधेयक पर चर्चा जारी है और माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर विस्तार से विचार किया जाएगा। हालांकि विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाला ऐसा कानून केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई विकसित देशों में भी विदेशी धन के प्रवाह पर कड़ी निगरानी रखने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्थाएं पहले से लागू हैं। इनका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और विदेशी प्रभाव को सीमित करना है।

भारत के प्रस्तावित एफसीआरए कानून का मकसद विदेशी स्रोतों से मिलने वाले आर्थिक सहयोग की पूरी जानकारी सरकार के पास उपलब्ध कराना है ताकि किसी भी संस्था या संगठन की वित्तीय गतिविधियों की पारदर्शी निगरानी की जा सके। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी धन के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और राष्ट्रीय हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

अमेरिका में विदेशी फंडिंग को फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट यानी एफएआरए के तहत नियंत्रित किया जाता है। इस कानून के अनुसार जो भी व्यक्ति या संस्था विदेशी सरकार या संगठन की ओर से अमेरिका में गतिविधियां संचालित करती है उसे न्याय विभाग के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। इसके साथ वित्तीय लेनदेन गतिविधियों और विदेशी सहयोग से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। अमेरिकी व्यवस्था में भी पारदर्शिता और नियमित निगरानी को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।

यूरोप के कई देशों ने भी विदेशी फंडिंग को लेकर सख्त नियम बनाए हैं। उदाहरण के तौर पर स्लोवाकिया में उन गैर सरकारी संगठनों के लिए वार्षिक डोनर रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है जिन्हें तय सीमा से अधिक विदेशी आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। सरकारी एजेंसियां ऐसे संगठनों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती हैं और नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी रखती हैं। इसका उद्देश्य विदेशी धन के स्रोत और उसके उपयोग को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखना है।

जॉर्जिया ने भी विदेशी प्रभाव पारदर्शिता कानून लागू किया है। इसके तहत जिन गैर सरकारी संगठनों या मीडिया संस्थानों की 20 प्रतिशत से अधिक फंडिंग विदेश से आती है उन्हें विदेशी वित्त पोषित संस्था के रूप में पंजीकरण कराना पड़ता है। साथ ही उनकी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करना नियमित ऑडिट कराना और सरकारी जांच में सहयोग देना भी अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड का प्रावधान भी रखा गया है।

रूस में भी विदेशी फंडिंग पर बेहद सख्त नियंत्रण है। वहां विदेशी आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होता है और उनकी वित्तीय गतिविधियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रखनी पड़ती है। सरकारी एजेंसियों को बिना पूर्व सूचना के ऑडिट करने लाइसेंस निलंबित करने या रद्द करने तथा विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों पर नियामकीय नियंत्रण स्थापित करने का अधिकार प्राप्त है। समय समय पर लाइसेंस का नवीनीकरण भी आवश्यक होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का प्रस्तावित एफसीआरए कानून वैश्विक व्यवस्था से अलग नहीं बल्कि उसी दिशा में उठाया गया कदम है जहां विदेशी धन के स्रोत उपयोग और प्रभाव की पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि अलग अलग देशों में कानूनों की प्रकृति और दायरा अलग हो सकता है लेकिन अधिकांश लोकतांत्रिक देशों का साझा उद्देश्य यही है कि विदेशी वित्तीय सहायता का उपयोग राष्ट्रीय हितों और कानूनी मानकों के अनुरूप हो तथा किसी भी प्रकार के छिपे हुए विदेशी प्रभाव को रोका जा सके।

English Tags:
FCRA Bill, Foreign Funding, FARA, NGOs, Global Laws

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