September 15, 2026

PoK में संकट गहराया, भोजन, दवा और ईंधन की भारी कमी, विरोध दबाने के आरोपों के बीच हालात तनावपूर्ण

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात गंभीर हो गए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद पर आरोप है कि उसने विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में भोजन, राशन, दवाओं और ईंधन की आपूर्ति पर रोक जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे कई इलाकों में मानवीय संकट गहरा गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक मुजफ्फरनगर, पुंछ, रावलाकोट, बाग और नीलम घाटी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों, ट्रक ड्राइवरों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि आवश्यक सामान ले जाने वाले वाहनों को सीमा चौकियों पर रोका जा रहा है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है।

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे शटडाउन और विरोध प्रदर्शनों के कारण पहले से ही आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित थी, लेकिन अब इसे और गंभीर बताया जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की नाकेबंदी से इनकार किया है, जबकि BBC उर्दू और डॉन जैसी मीडिया रिपोर्टों में हालात को चिंताजनक बताया गया है।

सीमा चौकियों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पीओके में खाद्यान्न और दवाओं की कमी के बाद लोग खैबर पख्तूनख्वा, रावलपिंडी और इस्लामाबाद से सामान लाने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें सीमा चौकियों पर रोका जा रहा है। आजाद पट्टन और फगवारी क्षेत्रों में तैनात पुलिस द्वारा व्यावसायिक और निजी वाहनों की जांच की जा रही है, जिससे कई वाहन लंबे समय से रुके हुए हैं और खराब होने वाला सामान नष्ट हो रहा है।

स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ीं

स्थानीय नागरिकों के अनुसार स्थिति बेहद कठिन हो गई है। एक निवासी नवीद ने बताया कि उन्हें रावलपिंडी से लाया गया भोजन और दवाएं ले जाने से रोका गया और कथित तौर पर सामान फेंकने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति देने की बात कही गई।

नीलम घाटी के निवासी अलिफ दीन के अनुसार, शटडाउन और आपूर्ति बाधित होने के कारण पिछले कई दिनों से राशन उपलब्ध नहीं है। सरकारी डिपो पर भुगतान के बावजूद लोगों को आटा नहीं मिल पा रहा है और खुले बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

दवा और ईंधन की गंभीर कमी

मुजफ्फरनगर के 64 वर्षीय मोहम्मद मकीन ने बताया कि क्षेत्र में दवाओं की भारी कमी है और सभी बड़े मेडिकल स्टोर पिछले दो सप्ताह से बंद पड़े हैं। वहीं पुंछ और मुजफ्फरनगर में पेट्रोल पंप बंद होने से लोग ब्लैक मार्केट से महंगा ईंधन खरीदने को मजबूर हैं।

आरोप और राजनीतिक बयानबाजी

पाकिस्तानी अधिकारियों ने नाकेबंदी के आरोपों से इनकार किया है, जबकि मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार बिना सीधे बल प्रयोग के प्रदर्शन समाप्त करने के लिए आपूर्ति लाइन बाधित करने की रणनीति अपना रही है।

पीओके में जारी विरोध का मुख्य कारण जम्मू-कश्मीर शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटें बताई जा रही हैं। स्थानीय समूहों का आरोप है कि इन सीटों के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित की जाती है। इसी मुद्दे पर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में आंदोलन जारी है, जिसके दौरान इंटरनेट सेवाएं भी बाधित की गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, झड़पों में अब तक कम से कम 58 लोगों की मौत का दावा किया गया है।

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की पीओके इकाई ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे गंभीर दमन बताया है।

बड़ा आंदोलन जारी

रिपोर्टों के अनुसार, रावलाकोट के ईदगाह मैदान में चल रहे धरने में पिछले दो हफ्तों में 70,000 से अधिक लोग शामिल हुए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो मुजफ्फरनगर तक 1,00,000 लोगों का बड़ा मार्च निकाला जा सकता है।

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