भारत-चीन रिश्तों पर पाकिस्तान के प्रभाव के सवाल पर चीन का जवाब, राजदूत बोले- सभी पड़ोसी हमारे लिए समान रूप से महत्वपूर्ण
नई दिल्ली । भारत और चीन के संबंधों में हाल के समय में दिखाई दे रही सकारात्मक गतिविधियों के बीच भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को विशेष महत्व देता है और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भारत, चीन और पाकिस्तान के त्रिकोणीय संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए चीनी राजदूत ने कहा कि चीन की विदेश नीति का आधार पड़ोसी देशों के साथ मित्रता, सहयोग और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के देशों सहित सभी पड़ोसी राष्ट्र चीन के लिए महत्वपूर्ण हैं और उनके साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना बीजिंग की प्राथमिकताओं में शामिल है।
राजदूत ने भारत और पाकिस्तान के संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश न केवल एक-दूसरे के पड़ोसी हैं बल्कि चीन के भी पड़ोसी हैं। ऐसे में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए संवाद का मार्ग सबसे उपयुक्त माना जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से अपने मतभेदों का समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
शू फेइहोंग ने कहा कि भौगोलिक वास्तविकताओं को बदला नहीं जा सकता और पड़ोसी देशों के बीच बेहतर संबंध पूरे क्षेत्र के विकास और समृद्धि में योगदान दे सकते हैं। उनके अनुसार, आपसी विश्वास और सहयोग न केवल संबंधित देशों के नागरिकों के लिए लाभकारी साबित होगा बल्कि व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता को भी मजबूती देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक राजनीति और आर्थिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एशिया में बढ़ते आर्थिक महत्व और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच क्षेत्रीय सहयोग को लेकर विभिन्न देशों की सक्रियता बढ़ी है। चीन भी अपने पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर लगातार जोर देता रहा है।
राजदूत ने भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर संपर्क बढ़ा है। उन्होंने आर्थिक और व्यापारिक सहयोग में आई वृद्धि को सकारात्मक संकेत बताया। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार विस्तार कर रहा है और भविष्य में सहयोग की संभावनाएं और अधिक मजबूत हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की दो बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के पास साझा विकास, निवेश, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। उनके अनुसार, आर्थिक साझेदारी का विस्तार दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है और क्षेत्रीय विकास को नई गति दे सकता है।
राजनयिक हलकों में इस बयान को दक्षिण एशिया में संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने की चीन की सार्वजनिक नीति के अनुरूप माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में प्रमुख एशियाई देशों के बीच संवाद, व्यापारिक साझेदारी और विश्वास निर्माण की प्रक्रिया भविष्य की कूटनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे महत्वपूर्ण देशों के बीच संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहती है। ऐसे में संवाद, कूटनीति और सहयोग पर दिया गया जोर क्षेत्रीय शांति और दीर्घकालिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
