पाकिस्तान में बाढ़ से भयंकर तबाही
– कृषि क्षेत्र को लगा जबरदस्त झटका

पाकिस्तान में आई भीषण बाढ़ ने खेती और उद्योग—दोनों को गहरी चोट पहुंचाई है। दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है जब बाढ़ ने एक साथ खेतों और शहरों को अपनी चपेट में ले लिया। इससे न सिर्फ पाकिस्तान के आम नागरिकों का नुकसान हुआ है बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भी अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान में खाद्य संकट, निर्यात में गिरावट और देश की पहले से ही नाजुक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।
IMF से 7 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज मिलने के बाद पाकिस्तान की सरकार को उम्मीद थी कि साल 2026 में अर्थव्यवस्था 4.2% की दर से बढ़ेगी। ये अनुमान सरकार ने खेती और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार के आधार पर लगाया था, लेकिन जून के अंत से शुरू हुई रिकॉर्ड बारिश और भारत की ओर से छोड़े गए बांधों के पानी ने पंजाब और सिंध को डुबो दिया—जो देश के सबसे अहम और घनी आबादी वाले सूबे हैं। इन इलाकों में अब तक पानी पूरी तरह से नहीं उतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार की बाढ़ 2022 से भी ज्यादा नुकसानदायक साबित हुई है, क्योंकि देश का एक-तिहाई हिस्सा पानी में डूब गया। खेती और फैक्ट्रियों—दोनों को एक साथ झटका लगा है।
सेटेलाइट और ड्रोन कैमरों के जरिये ली गई तस्वीरों से देखा जा सकता है कि पाकिस्तान में अब भी एक बड़ा इलाका पानी डुबा हुआ है। एक रिपोर्ट मुताबिक सिर्फ 1 अगस्त से 16 सितंबर के बीच लगभग 2 लाख 20 हजार हेक्टेयर धान की फसल पानी में डूब गई है। पंजाब में, जहां सबसे ज्यादा चावल, कपास और मक्का पैदा होता है, वहां 18 लाख एकड़ जमीन बाढ़ से प्रभावित हुई है। पाकिस्तान किसान संघ के अध्यक्ष खालिद बट का कहना है कि लगभग 50% धान, 60% कपास और मक्का की फसलें तबाह हो चुकी हैं। कुल नुकसान 2.5 मिलियन एकड़ तक पहुंच सकता है, जिसकी कीमत एक ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये यानी करीब 3.5 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है। कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. इकरार अहमद खान का कहना है कि देश की कुल फसलों का लगभग 10% हिस्सा बर्बाद हो गया है। कुछ जिलों में तो 90% तक सब्ज़ियां खत्म हो चुकी हैं।
पाकिस्तान में यह समय बेहद नाजुक है, क्योंकि अब गेहूं की बुवाई शुरू होने वाली है—जो पाकिस्तान की करीब आधी कैलोरी जरूरतों को पूरा करता है। साल 2024 की अच्छी फसल के बाद भंडारण तो सही है, लेकिन जिन खेतों में अभी तक कीचड़ और गाद भरी हुई है, वहां समय पर बुवाई मुश्किल हो सकती है। बढ़ती महंगाई के संकेत पहले ही मिलने लगे हैं। गेहूं, चीनी, प्याज़ और टमाटर की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इससे महंगाई के सूचकांक ने पिछले 26 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। प्लानिंग मिनिस्टर एहसान इकबाल ने माना है कि बाढ़ GDP को “पीछे ले जाएगी”। वहीं पाकिस्तान स्टेट बैंक का कहना है कि यह एक “अस्थायी लेकिन बड़ा सप्लाई शॉक” है। बैंक ने विकास दर को 3.25% से 4.25% के निचले सिरे पर रहने की संभावना जताई है। दूसरी ओर IMF के प्रतिनिधि महिर बिनिची ने बताया है कि आने वाले हफ्तों में बजट और इमरजेंसी फंड्स की समीक्षा की जाएगी ताकि ये देखा जा सके कि 2026 के लिए बनाया गया बजट इस आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त है या नहीं।
बता दें कि पाकिस्तान में बाढ़ से उद्योग जगत को भी गहरा झटका लगा है। सियालकोट जैसे औद्योगिक शहर, जो टेक्सटाइल, खेल सामान और सर्जिकल उपकरणों के लिए जाने जाते हैं, वहां कई वर्कशॉप पानी में घिर गई हैं। कपास की कमी से कपड़ा उद्योग पर असर पड़ रहा है जो कि देश का सबसे बड़ा निर्यात है। चावल की कीमतें बढ़ने से भारत के मुकाबले प्रतिस्पर्धा भी कमजोर हो सकती है। मुल्तान के पास एक किसान रब नवाज़ ने बताया कि उनके पास 400 एकड़ कपास की खेती थी, लेकिन अब सिर्फ 90 एकड़ ही बची है। 26 जून से अब तक 1,006 लोगों की मौत हो चुकी है और पंजाब व सिंध में 25 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा है। लाहौर जैसे बड़े शहरों में भी घर और छोटे व्यवसाय तहस-नहस हो गए हैं।
