March 10, 2026

बैटरी रीसाइक्लिंग ने हवा और मिट्टी को बना दिया जहरीला, इंसानों पर पड़ रहा बुरा असर

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नई दिल्ली। बैटरी रीसाइक्लिंग (Battery recycling) के बढ़ते चलन ने हवा और मिट्टी (Air and soil) के साथ-साथ लोगों के भविष्य को भी जहरीला कर दिया है.बांग्लादेश (Bangladesh.) में यह एक बढ़ता हुआ कारोबार है लेकिन यह बच्चों की जान ले रहा है.बांग्लादेश (Bangladesh.) के जुनैद अख्तर (Junaid Akhtar.) की उम्र 12 साल है, लेकिन उसके खून में मौजूद जहरीले सीसे के कारण उसका विकास प्रभावित हुआ है और वह अपनी उम्र से कई साल छोटा दिखता है.

जुनैद उन 3.5 करोड़ बच्चों में से एक है जिनके शरीर में सीसे का खतरनाक स्तर है.यह संख्या इस दक्षिण एशियाई देश के सभी बच्चों का लगभग 60 प्रतिशत है.बैटरी रीसाइक्लिंग का खतरनाक असरइसके पीछे अलग-अलग कारण हैं, लेकिन जुनैद की मां बिथी अख्तर अपने बेटे की बीमारी के लिए एक बंद फैक्ट्री को जिम्मेदार ठहराती हैं, जो मुनाफे के लिए पुरानी कार बैटरियों को तोड़कर उनका रीसाइक्लिंग करती थी.इस प्रक्रिया ने इस छोटे से गांव की हवा और मिट्टी को जहरीला कर दिया.

अख्तर ने एजेंसी को बताया, “यह प्रक्रिया रात में शुरू होती थी और पूरा क्षेत्र धुएं से भर जाता. जब मैं सांस लेती तो मुझे एक खास गंध आती थी” उन्होंने कहा, “इस मौसम में फल नहीं उगे.एक दिन मेरी चाची के घर पर दो गाय मरी पाई गईं”मेडिकल टेस्ट से पता चला कि जुनैद के खून में सीसे की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित स्तर से दोगुनी थी, जो छोटे बच्चों में गंभीर तथा संभवतः अपरिवर्तनीय मानसिक क्षति का कारण बन सकती है. अख्तर कहती हैं, “वह दूसरी कक्षा से ही हमारी बात नहीं सुनता था, वह स्कूल नहीं जाना चाहता था” उन्होंने बताया कि उनका बेटा हर समय रोता रहता है.

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बांग्लादेश में सीसा प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है और इसके कई कारण हैं.इनमें से प्रमुख है इस भारी धातु का पेंट में व्यापक इस्तेमाल, जो सरकारी प्रतिबंध के बावजूद जारी है.दूसरी ओर, इसका इस्तेमाल हल्दी जैसे मसालों के रंग और गुणवत्ता को सुधारने के लिए एक योजक के रूप में भी किया जाता है.लेकिन अधिकांश घटनाओं के लिए अनौपचारिक बैटरी रीसाइक्लिंग कारखानों को दोषी ठहराया जाता है, जो बढ़ती मांग के कारण देशभर में खुल गए हैं.खतरनाक स्तर के सीसे के संपर्क में आने वाले बच्चों में बुद्धि और संज्ञानात्मक क्षमता में कमी के साथ-साथ एनीमिया, विकास में देरी और आजीवन तंत्रिका संबंधी विकार होने का खतरा रहता है.

अख्तर के परिवार के गांव में स्थित फैक्ट्री को समुदाय की लगातार शिकायतों के बाद बंद कर दिया गया, लेकिन पर्यावरण निगरानी संस्था “प्योर अर्थ” का मानना है कि देश भर में 265 जगहों पर अभी भी इसी तरह का काम किया जा रहा है.”प्योर अर्थ” की मिताली दास ने एएफपी को बताया, “वे पुरानी बैटरियों को तोड़ते हैं, उनमें से सीसा निकालते हैं और उसे पिघलाकर नई बैटरियां बनाते हैं” उन्होंने कहा यह सब खुले आसमान के नीचे होता है.इस प्रक्रिया से निकलने वाला जहरीला धुआं और एसिड वाला जल हवा, मिट्टी और पानी को प्रदूषित करता है.एक गांव की “मौत”राजधानी ढाका से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित फुलबरिया गांव में एक चीनी कंपनी के स्वामित्व वाली बैटरी रीसाइक्लिंग फैक्ट्री पूरी तरह से चालू हो गई है.एक ओर हरे-भरे खेत हैं और दूसरी ओर एक पाइप से गंदा पानी खारे तालाब में बहता है, जिसके चारों ओर नारंगी कीचड़ से ढकी बंजर भूमि है.

34 साल के स्थानीय निवासी और इंजीनियर रकीब हसन कहते हैं, “बचपन में मैं अपने पिता के लिए खेतों में खाना लेकर जाता था.उस वक्त नजारा अलग ही था, चारों ओर हरियाली थी और पानी साफ था.अब देखिए क्या हुआ. यह हमेशा के लिए मर चुका है, उन्होंने हमारे गांव को मार डाला”हसन ने फैक्ट्री से होने वाले प्रदूषण की शिकायत की, जिस पर निचली अदालत ने इसे अवैध घोषित कर दिया और बिजली काटने का आदेश दिया, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया.हसन आरोप लगाते हैं,

“फैक्ट्री ने स्थानीय अधिकारियों को खरीद लिया, हमारा देश गरीब है, यहां कई लोग भ्रष्ट हैं” फैक्ट्री के ऑपरेशन पर टिप्पणी के अनुरोध पर न तो कंपनी और न ही ढाका स्थित चीनी दूतावास ने कोई जवाब दिया.बांग्लादेश की पर्यावरण मंत्री सईदा रिजवाना हसन ने भी इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया क्योंकि यह मामला अभी भी अदालत में है.

हालांकि, उन्होंने कहा, “हम नियमित रूप से इलेक्ट्रिक बैटरियों के अवैध उत्पादन और रीसाइक्लिंग के खिलाफ अभियान चलाते हैं, लेकिन इस समस्या की व्यापकता की तुलना में ये प्रयास नाकाफी हैं”जर्मनी में फेंके जाने वाले कपड़े का कचरा 55 फीसदी बढ़ाबैटरी रीसाइक्लिंग का बढ़ता कारोबारअनौपचारिक बैटरी रीसाइक्लिंग बांग्लादेश में तेजी से बढ़ता हुआ कारोबार है, जो मुख्य रूप से रिक्शों के बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण से प्रेरित है.बांग्लादेश की सड़कों पर 40 लाख से अधिक रिक्शा हैं, और अधिकारियों का अनुमान है कि उन सभी को इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी से लैस करने का बाजार लगभग 87 करोड़ डॉलर का है.संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की माया वेन्डेनैंट कहती हैं, “यह इलेक्ट्रिक होने का नकारात्मक पक्ष है” वह सख्त नियमों और टैक्स प्रोत्साहनों के माध्यम से उद्योग को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने की रणनीति पर काम कर रही हैं.उन्होंने कहा, “अधिकांश लोग इसके खतरों से अनजान हैं और इसका सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर 6.9 प्रतिशत तक पड़ सकता है”.

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