May 6, 2026

अमेरिका पर बढ़ रहा कर्ज, जीडीपी से ज्यादा हुआ राष्ट्रीय ऋण, डोनाल्ड ट्रंप के लिए बनी बड़ी चुनौती

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नई दिल्ली। अमेरिका में आर्थिक संकट की चिंता गहराती जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय से जुड़ी चर्चाओं के बीच अब सबसे बड़ा मुद्दा देश पर बढ़ता कर्ज है, जो अब देश की जीडीपी से भी अधिक हो चुका है। यह स्थिति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार देखने को मिली है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

कमेटी फॉर ए रिस्पॉन्सिबल फेडरल बजट की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के अंत तक अमेरिका पर कुल कर्ज लगभग 31.27 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि इसी अवधि में देश की जीडीपी करीब 31.22 ट्रिलियन डॉलर रही। यानी कर्ज ने आर्थिक उत्पादन को पीछे छोड़ दिया है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 2026 में बढ़कर लगभग 39.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्थिति 1940 के दशक के बाद पहली बार बनी है, जब युद्धकालीन खर्चों के कारण कर्ज जीडीपी से अधिक हो गया था।

कर्ज बढ़ने की वजह क्या है?
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मौजूदा कर्ज वृद्धि के पीछे कई कारण हैं टैक्स कटौती, बढ़ता ब्याज भुगतान, और सामाजिक सुरक्षा व स्वास्थ्य योजनाओं जैसे मेडिकेयर और सोशल सिक्योरिटी पर बढ़ता खर्च। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब रक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर जितना खर्च करती है, उससे अधिक पैसा सिर्फ कर्ज के ब्याज भुगतान में जा रहा है। अनुमान है कि नेट ब्याज भुगतान ही सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पहुंच चुका है।

तेजी से बढ़ता कर्ज
आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में अमेरिकी कर्ज लगभग दोगुना हो गया है। 2017 में यह करीब 20.2 ट्रिलियन डॉलर था, जो अब 39 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। 1990 की तुलना में यह वृद्धि कई गुना अधिक है। कांग्रेस बजट कार्यालय के अनुमान के अनुसार, अगर यही रफ्तार बनी रही तो 2036 तक अमेरिका का कुल कर्ज 53 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

https://twitter.com/stats_feed/status/2051669630037418391


आर्थिक खतरे की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता कर्ज अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। इससे ब्याज दरों में वृद्धि, निवेशकों का भरोसा कमजोर होना और देश की क्रेडिट रेटिंग में गिरावट जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, सरकार पर बढ़ते कर्ज का दबाव आम नागरिकों की जीवन-लागत को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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