March 8, 2026

US टैरिफ से तमिलनाडु के उद्योग बेहाल: कोयंबटूर–तिरुपुर में रोजगार और निर्यात को बड़ा झटका

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नई दिल्ली। कभी भारत के प्रमुख औद्योगिक और निर्यात केंद्रों में गिने जाने वाले तमिलनाडु के कोयंबटूर और तिरुपुर इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद यहां के कपड़ा और इंजीनियरिंग उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं, काम के घंटे घटाए जा रहे हैं और लाखों कामगारों की रोजी-रोटी संकट में पड़ गई है।

50% टैरिफ ने बदले हालात

उद्योग जगत के अनुसार, अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद से ही कोयंबटूर और तिरुपुर के उद्योगों में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। ये दोनों शहर मिलकर तमिलनाडु समेत कई राज्यों के लाखों लोगों को रोजगार देते थे, लेकिन अब हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

दो से तीन लाख नौकरियां जा चुकीं

उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब तक कपड़ा और इंजीनियरिंग सेक्टर में दो लाख से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं। यदि कास्टिंग, पंप, औद्योगिक वाल्व और अन्य सहायक उद्योगों को भी शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा तीन लाख से अधिक हो सकता है। कई छोटी और मझोली इकाइयां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जबकि कई फैक्ट्रियां सीमित क्षमता पर काम कर रही हैं।

अमेरिका को निर्यात में भारी गिरावट

एक निजी मिल में परिधान निर्यात और व्यापार विकास के उपाध्यक्ष धनबालन के अनुसार, पहले कोयंबटूर और तिरुपुर से अमेरिका को हर साल करीब 1.7 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात होता था। लेकिन अब यह आंकड़ा लगभग एक अरब डॉलर घट चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 50 प्रतिशत टैरिफ जारी रहा, तो अगले एक साल में अमेरिका को कपड़ा निर्यात लगभग पूरी तरह बंद हो सकता है।

डीडीपी कीमत ने बढ़ाई मुश्किल

उद्योग जगत का कहना है कि समस्या सिर्फ 50 प्रतिशत टैरिफ तक सीमित नहीं है। इसके साथ अन्य शुल्क भी जोड़े जाते हैं, जिससे डिलीवर ड्यूटी पेड (DDP) कीमत काफी बढ़ जाती है। नतीजतन, अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद बेहद महंगे हो जाते हैं। वहीं चीन और बांग्लादेश जैसे देश करीब 30 प्रतिशत कम लागत में अपने उत्पाद बेच रहे हैं, जिससे भारतीय सामान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है।

500% टैरिफ की आशंका से बढ़ी चिंता

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब खबरें सामने आईं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर विचार कर सकते हैं। इस पर धनबालन ने कहा कि जब 50 प्रतिशत टैरिफ ही उद्योगों को तोड़ रहा है, तो 500 प्रतिशत टैरिफ की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अगर ऐसा हुआ, तो निर्यात और रोजगार दोनों पर विनाशकारी असर पड़ेगा।

नए बाजारों की तलाश की मांग

अमेरिकी बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निर्यातक अब भारत सरकार और उद्योग संगठनों से नए बाजारों पर फोकस करने की मांग कर रहे हैं। उद्योग जगत का सुझाव है कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन को प्राथमिक बाजार बनाया जाए। उनका कहना है कि उद्योगों के अस्तित्व के लिए अब बाजारों में विविधता लाना बेहद जरूरी हो गया है।

कामगारों का भविष्य अधर में

वैश्विक व्यापार में बढ़ते तनाव और अमेरिकी टैरिफ नीति के चलते कोयंबटूर और तिरुपुर के लाखों कामगारों का भविष्य इस समय गंभीर संकट में नजर आ रहा है। अगर जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गहराने की आशंका है।

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