16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन को मिली वैश्विक सराहना, रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने पर जापानी मीडिया का जोर
शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताई। बातचीत में आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, ऊर्जा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
जापानी मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख किया गया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की उपलब्धता जापान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे समय में भारत का विशाल बाजार, तेजी से विकसित होता विनिर्माण क्षेत्र और कुशल मानव संसाधन जापान के लिए एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। इसी कारण दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विश्लेषणों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को भी प्रमुख विषय बताया गया। रिपोर्टों के अनुसार जापान भारत को स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के संदर्भ में दोनों देशों के बीच सहयोग को भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा सहयोग को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा अभ्यासों को और मजबूत करने, नौसैनिक सहयोग बढ़ाने, रक्षा उपकरणों के विकास तथा आधुनिक सैन्य तकनीकों के आदान-प्रदान को गति देने पर जोर दिया। साथ ही रक्षा उत्पादन में सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई।
बातचीत के दौरान ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक खनिज संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया। दोनों देशों ने वैश्विक आपूर्ति में आने वाली संभावित बाधाओं से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति जताई। इसके अलावा उच्च तकनीक आधारित संचार प्रणालियों और रक्षा उपकरणों से जुड़े सहयोग को भी नई गति देने का निर्णय लिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते संबंध केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। हालिया शिखर सम्मेलन से स्पष्ट संकेत मिला है कि दोनों देश रणनीतिक विश्वास, साझा हितों और दीर्घकालिक सहयोग के आधार पर अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में इस सहयोग के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
