March 13, 2026

जब टीवी पर सुनी श्रेया घोषाल की आवाज, संजय लीला भंसाली ने दिया पहला बड़ा मौका

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नई दिल्ली। अक्सर आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को यह भी स्पष्ट नहीं होता कि वे आगे किस क्षेत्र में जाना चाहते हैं, लेकिन उसी उम्र में एक लड़की बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने का सपना देख रही थी। वह नहीं जानती थी कि एक दिन उसकी आवाज हिंदी सिनेमा की पहचान बन जाएगी। हम बात कर रहे हैं मशहूर गायिका Shreya Ghoshal की, जो 12 मार्च को अपना 41वां जन्मदिन मना रही हैं। कोटा के एक छोटे से गांव से निकलकर संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली श्रेया आज भारतीय फिल्म संगीत की सबसे लोकप्रिय आवाजों में से एक मानी जाती हैं।

मां से मिली संगीत की पहली सीख
कहा जाता है कि मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है और श्रेया घोषाल के जीवन में भी यह बात पूरी तरह सच साबित हुई। उनकी मां स्वयं बहुत अच्छा गाती थीं और उन्होंने ही छोटी उम्र में श्रेया की प्रतिभा को पहचान लिया था। महज छह साल की उम्र में ही उन्होंने श्रेया को संगीत की शिक्षा दिलानी शुरू कर दी। स्कूल के वार्षिक समारोहों में जब भी श्रेया मंच पर गातीं, उनकी आवाज सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते। आगे चलकर उन्होंने प्रसिद्ध संगीतकार Kalyanji और गुरु Mukta Bhide से शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसने उनकी गायकी को मजबूत आधार दिया।

पढ़ाई में साइंस, दिल में संगीत
बहुत कम लोग जानते हैं कि श्रेया घोषाल पढ़ाई में साइंस की छात्रा रही हैं। उन्होंने 12वीं तक साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई की थी, लेकिन संगीत के प्रति उनके जुनून ने उन्हें आगे चलकर आर्ट्स की पढ़ाई और संगीत प्रशिक्षण की ओर मोड़ दिया। हालांकि तब तक उनकी आवाज लाखों लोगों तक पहुंचने लगी थी और उनका करियर एक नए मोड़ की ओर बढ़ रहा था।

टीवी शो से मिला बड़ा मौका
श्रेया घोषाल के करियर का सबसे अहम मोड़ तब आया जब उन्होंने लोकप्रिय म्यूजिक रियलिटी शो Sa Re Ga Ma Pa में हिस्सा लिया। इस शो में उनकी गायकी ने जजों और दर्शकों दोनों को प्रभावित किया और वे फाइनल तक पहुंचीं। इसी दौरान एक दिन निर्देशक Sanjay Leela Bhansali अपनी मां के साथ टीवी पर यह शो देख रहे थे। उस समय वे फिल्म Hum Dil De Chuke Sanam बना रहे थे और उनके मन में भविष्य में Devdas बनाने का विचार भी चल रहा था। श्रेया की आवाज सुनते ही वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तय कर लिया कि आने वाली फिल्म में पारो के किरदार के लिए यही आवाज उपयुक्त रहेगी।

‘बैरी पिया’ से बदल गई किस्मत
भंसाली ने शो के जरिए ही श्रेया से संपर्क किया और उन्हें फिल्म देवदास का गाना Bairi Piya गाने का मौका दिया। उस समय श्रेया की उम्र सिर्फ साढ़े पंद्रह साल थी। शास्त्रीय संगीत की मजबूत पृष्ठभूमि होने के कारण यह गाना उनके लिए बहुत कठिन नहीं था। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दिन उन्होंने पहली ही कोशिश में गाना इतनी खूबसूरती से गाया कि सभी लोग हैरान रह गए। भंसाली उनकी गायकी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें गले लगा लिया।

पहले ही गाने से मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
श्रेया घोषाल के करियर की शुरुआत ही ऐतिहासिक रही। देवदास के इस गाने ने उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी और उन्हें अपने पहले ही फिल्मी गीत के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छूती चली गईं।

20 से अधिक भाषाओं में गाए गीत
आज श्रेया घोषाल हिंदी ही नहीं बल्कि 20 से अधिक भाषाओं में गाने गा चुकी हैं। उनकी मधुर आवाज ने भारतीय संगीत जगत को कई यादगार गीत दिए हैं। उन्होंने Sun Raha Hai Na Tu, Tujh Mein Rab Dikhta Hai, Jadu Hai Nasha Hai और Manwa Laage जैसे कई सुपरहिट रोमांटिक गीत गाए हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका नाम सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली महिला गायिकाओं में भी दर्ज किया जाता है।

संगीत की दुनिया की अमिट आवाज
टीवी के एक मंच से शुरू हुआ यह सफर आज भारतीय संगीत जगत की सबसे चमकदार कहानी बन चुका है। श्रेया घोषाल की आवाज ने न सिर्फ फिल्मों को नई पहचान दी बल्कि लाखों श्रोताओं के दिलों में भी खास जगह बनाई है। उनकी गायकी आज भी उतनी ही ताजगी और भावनाओं से भरी हुई है, जितनी उनके करियर की शुरुआत में थी।

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