जब 16 हजार लौटाकर मोहम्मद रफी ने रच दिया इंसानियत का इतिहास, जीतेंद्र भी रह गए हैरान
हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर के दिग्गज पार्श्वगायक मोहम्मद रफी को उनकी बेहतरीन आवाज के साथ-साथ उनकी सादगी और इंसानियत के लिए भी याद किया जाता है। उनसे जुड़ा एक ऐसा ही भावुक किस्सा अभिनेता जीतेंद्र ने साझा किया था, जो आज भी लोगों के दिलों को छू जाता है।
दरअसल, कुछ साल पहले एक संगीत समारोह में जीतेंद्र ने अपने और मोहम्मद रफी के बीच का एक पुराना अनुभव सुनाया था। उन्होंने बताया कि वे एक मिडिल क्लास परिवार से थे और बाद में उन्होंने फिल्म प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा। अपनी कंपनी “तिरुपति फिल्म्स” के तहत उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण किया, जिनमें ‘हमजोली’, ‘परिचय’, ‘खुशबू’, ‘ज्योति बने ज्वाला’ और ‘दीदार-ए-यार’ जैसी फिल्में शामिल थीं।
‘दीदार-ए-यार’ उनके करियर की सबसे महंगी फिल्मों में से एक थी, जिसमें ऋषि कपूर भी मुख्य भूमिका में थे। इसी फिल्म के लिए मोहम्मद रफी ने एक गाना गाया था, जिसके लिए उन्हें शुरुआत में 4 हजार रुपये फीस दी गई थी। समय के साथ फिल्म का बजट बढ़ गया और बाद में एक और गाना किशोर कुमार और मोहम्मद रफी दोनों ने मिलकर रिकॉर्ड किया।
इस दौरान जीतेंद्र के मैनेजर ने निर्णय लिया कि दोनों गायकों को समान फीस दी जाए और उन्होंने मोहम्मद रफी को 20 हजार रुपये भेज दिए। लेकिन जब यह बात मोहम्मद रफी तक पहुंची, तो उन्होंने इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब फिल्म की शुरुआत में उनकी फीस 4 हजार तय हुई थी, तो उससे अधिक पैसे लेना उन्हें स्वीकार नहीं है।
इसके बाद मोहम्मद रफी ने केवल 4 हजार रुपये ही अपने पास रखे और बाकी 16 हजार रुपये वापस कर दिए। उन्होंने साफ कहा कि वे सिर्फ उतनी ही रकम लेंगे जितनी शुरुआत में तय हुई थी। उनकी इस ईमानदारी और विनम्रता ने जीतेंद्र को गहराई से प्रभावित किया और यह किस्सा आज भी वह भावुक होकर याद करते हैं।
यह घटना सिर्फ एक लेन-देन की कहानी नहीं है, बल्कि उस दौर के कलाकारों की सादगी, सिद्धांत और सम्मान की भावना को भी दर्शाती है, जो आज के समय में भी मिसाल के रूप में देखी जाती है।
