चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 महीने की जेल बरकरार रखी
2010 में फिल्म निर्माण के लिए लिया था 5 करोड़ रुपये का कर्ज
यह मामला वर्ष 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और तय समय पर कर्ज की अदायगी नहीं हो सकी। कंपनी को दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा।
2018 में सुनाई गई थी सजा
अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। वर्ष 2019 में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद अभिनेता ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की।
मामले से जुड़े सात अलग-अलग प्रकरणों में वर्ष 2025 के अंत तक करीब 9 करोड़ रुपये की देनदारी बताई गई थी, जिसमें प्रत्येक मामले में लगभग 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था।
अदालत ने वादे पूरे नहीं करने पर जताई नाराजगी
जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए राजपाल यादव को बकाया राशि चुकाने का अवसर दिया था। हालांकि अदालत के अनुसार अभिनेता बार-बार अपने आश्वासन पूरे करने में असफल रहे। इसी कारण 2 फरवरी को उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया था और अब अदालत ने उनकी सजा को भी बरकरार रखा है।
बयानों में विरोधाभास पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों और पहले दिए गए आश्वासनों में विरोधाभास है। एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि उसके सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए जा रहे हैं और पहले दी गई अंडरटेकिंग से अलग बातें कही जा रही हैं।
शिकायतकर्ता कंपनी का पक्ष
शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता अवनीत सिंह सिक्का ने अदालत में कहा कि राजपाल यादव पहले ही अपनी सजा स्वीकार कर चुके हैं और अब वे अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।
समझौते की कोशिश भी नहीं हुई सफल
मामले के समाधान के लिए हाईकोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया। अदालत के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी 6 करोड़ रुपये लेकर अंतिम समझौते के लिए भी तैयार हो गई थी, लेकिन राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
अभिनेता ने अदालत को बताया कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, यहां तक कि संपत्ति भी बेचनी पड़ी और वे पहले ही काफी राशि चुका चुके हैं। अदालत ने 3 करोड़ रुपये के भुगतान का एक संभावित तरीका भी सुझाया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यह केवल न्यायिक सुझाव है, अंतिम समझौता नहीं। कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष सहमति तक नहीं पहुंच सके। इसके बाद हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
फरवरी 2026 में मिली थी अंतरिम जमानत
चेक बाउंस मामले में आत्मसमर्पण के बाद राजपाल यादव 5 फरवरी 2026 को दिल्ली की तिहाड़ जेल भेजे गए थे। बाद में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने 1.5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद 17 फरवरी 2026 को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था। अब अदालत ने उनकी तीन महीने की सजा को बरकरार रखते हुए दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया है।
