March 8, 2026

परवीन बाबी: बॉलीवुड की चमकती हसीना, अकेलेपन और बीमारी के बीच डूब गई जिंदगी

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नई दिल्ली। बॉलीवुड में शोहरत जितनी तेजी से मिलती है उतनी ही बेरहमी से छिन भी जाती है। इस बात का सबसे दर्दनाक उदाहरण हैं 70 और 80 के दशक की ग्लैमरस और बोल्ड अभिनेत्री परवीन बाबी। पर्दे पर आत्मविश्वास और ग्लैमर की नई परिभाषा गढ़ने वाली परवीन असल जिंदगी में अकेलेपन मानसिक बीमारी और गुमनामी से जूझती रहीं।

परवीन बाबी का जन्म 4 अप्रैल 1954 को गुजरात के जूनागढ़ में हुआ। एक नवाबी परिवार में जन्मी परवीन ने कम उम्र में ही पिता का साथ खो दिया लेकिन उनका पालन-पोषण अच्छे माहौल में हुआ। 18 साल की उम्र में उन्होंने मॉडलिंग शुरू की। अहमदाबाद में एक शूटिंग के दौरान फिल्ममेकर बी.आर. इशारा की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने परवीन को फिल्मों में कदम रखने का मौका दिया।

साल 1974 में परवीन नेमजबूर फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा और अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी बेहद सफल रही। इसके बाद उन्होंनेदीवारअमर अकबर एंथनीनमक हलाल जैसी सुपरहिट और कल्ट फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई।परवीन की निजी जिंदगी भी हमेशा सुर्खियों में रही। उनका नाम अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा कबीर बेदी और फिल्ममेकर महेश भट्ट से जुड़ा। महेश भट्ट के साथ उनका रिश्ता सबसे चर्चित रहा लेकिन समय के साथ यह रिश्ता टूट गया और परवीन की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी।

परवीन पैरानॉइड सिज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं। इस बीमारी में व्यक्ति को भ्रम होने लगता है कि उसके आसपास के लोग उसे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कई बार अपने करीबियों और फिल्मी हस्तियों पर गंभीर आरोप लगाए और धीरे-धीरे उन्होंने खुद को दुनिया से अलग कर लिया।22 जनवरी 2005 को परवीन बाबी की मौत हुई। उनके फ्लैट में 2-3 दिन तक दूध और अखबार पड़े रहने के कारण पड़ोसियों को शक हुआ। पुलिस ने जब दरवाजा खोला तो उनका शव बिस्तर पर पड़ा मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनकी मौत मल्टीपल ऑर्गन फेलियर से हुई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उनके पेट में खाने का एक निवाला तक नहीं था यानी वह भूख से भी जूझ रही थीं।

उनका अंतिम संस्कार मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ क्योंकि उस समय उन्हें पहचानने वाला कोई नहीं था।परवीन बाबी की कहानी केवल एक अभिनेत्री की नहीं है बल्कि यह ग्लैमर और शोहरत के पीछे छिपे अकेलेपन और मानसिक संघर्ष की कड़वी सच्चाई की याद दिलाती है। चमकते सितारे की यह जिंदगी अंत में गुमनामी बीमारी और तन्हाई में समाप्त हुई।

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