March 13, 2026

रील नहीं रियल कॉलेज कैंपस: देहरादून के जंगलों से लेकर मुंबई के सेंट जेवियर्स तक, जब फिल्मी सितारों ने यहाँ ली क्लासेज

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नई दिल्ली।  बॉलीवुड फिल्मों में कॉलेज लाइफ की अपनी एक अलग ही चमक होती है। दोस्ती, मस्ती और पहली बार प्यार का अहसास-ये सभी भावनाएं तब और भी जीवंत हो जाती हैं जब उन्हें किसी खूबसूरत कॉलेज कैंपस में फिल्माया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि कई बड़े बजट की फिल्मों ने इसके लिए कृत्रिम सेट बनाने के बजाय भारत के असली और गौरवशाली कॉलेजों को चुना है।

इस फेहरिस्त में सबसे पहला नाम आता है आलिया भट्ट, वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा की डेब्यू फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ का। फिल्म में जिस ‘सेंट टेरेसा’ कॉलेज को दिखाया गया है, वह असल में देहरादून का ऐतिहासिक फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट FRI है। इसकी वास्तुकला इतनी भव्य है कि यह पहली नजर में किसी विदेशी कॉलेज जैसा आभास देती है। वहीं, सुशांत सिंह राजपूत और श्रद्धा कपूर की फिल्म ‘छिछोरे’ ने दर्शकों की यादें ताजा कर दीं। इस फिल्म की शूटिंग असल में IIT बॉम्बे के हॉस्टल्स और कैंपस में की गई थी, जिससे फिल्म की कहानी को और भी प्रामाणिकता मिली।

इम्तियाज अली की मास्टरपीस फिल्म ‘रॉकस्टार’ में रणबीर कपूर का जो कॉलेज दिखाया गया है, वह दिल्ली का मशहूर सेंट स्टीफन कॉलेज है। रणबीर के ‘जनार्दन जाखड़’ बनने का सफर इसी कैंपस की गलियों से शुरू हुआ था। दूसरी तरफ, ‘3 इडियट्स’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म, जिसने भारतीय शिक्षा प्रणाली पर गहरी चोट की, उसकी शूटिंग बेंगलुरु के इम्पीरियल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग IIM-B में हुई थी। फिल्म की अधिकांश शूटिंग इसी कैंपस में की गई, जिसने कहानी के हर मोड़ को यादगार बना दिया।

युवा पीढ़ी के उभरते सितारे खुशी कपूर और इब्राहिम अली खान की फिल्म ‘नादानियां’ के लिए भी पुणे की मशहूर फ्लेम यूनिवर्सिटी को चुना गया। वहीं, साल 2008 की रोमांटिक हिट ‘जाने तू या जाने ना’ में जय और अदिति के कॉलेज की यादें आज भी प्रशंसकों के जेहन में ताजा हैं, जिसकी शूटिंग मुंबई के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स कॉलेज में हुई थी। इसी कड़ी में चेतन भगत के उपन्यास पर आधारित फिल्म ‘2 स्टेट्स’ का जिक्र भी जरूरी है। आलिया भट्ट और अर्जुन कपूर की इस प्रेम कहानी को IIM अहमदाबाद के कैंपस में फिल्माया गया, जो फिल्म की संस्कृति और माहौल को पूरी तरह से मेल खाता था। इन असली कॉलेजों की वजह से ही ये फिल्में दर्शकों को खुद से जुड़ी हुई महसूस हुईं।

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