September 4, 2026

फरहान-जोया की परवरिश पर जावेद अख्तर का बड़ा खुलासा! बोले बच्चों को किसी धर्म से नहीं जोड़ा

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नई दिल्ली । मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अपनी बेबाक राय और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। धर्म को लेकर भी वह कई बार खुलकर अपनी बात रख चुके हैं। अब उन्होंने अपने बच्चों फरहान अख्तर और जोया अख्तर की परवरिश से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। जावेद अख्तर ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही अपने दोनों बच्चों को किसी धार्मिक पहचान से नहीं जोड़ा। उनके मुताबिक बच्चों को यह तय करने की आजादी दी गई कि बड़े होने पर वे धर्म और आस्था को किस तरह देखते हैं।

जावेद अख्तर ने एक बातचीत में बताया कि यह किस्सा उस समय का है जब फरहान अख्तर करीब 7 या 8 साल के थे। एक दिन वह स्कूल से घर लौटे और अपने पिता से एक ऐसा सवाल पूछ बैठे जिसने जावेद को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। फरहान ने उनसे पूछा कि क्या हम मुस्लिम हैं। यह सवाल इसलिए भी स्वाभाविक था क्योंकि बच्चे अपने आसपास के लोगों और समाज से धर्म और समुदाय को लेकर बातें सुनते हुए बड़े होते हैं। लेकिन जावेद ने बेटे को किसी धार्मिक पहचान में बांधने के बजाय उसे एक अलग नजरिया समझाया।

जावेद अख्तर के मुताबिक उन्होंने फरहान से कहा कि इंसान जिस शहर या समुदाय में पैदा होता है उससे उसकी असली पहचान तय नहीं होती। कोई व्यक्ति मुंबई पुणे आगरा अहमदाबाद लंदन या न्यूयॉर्क में पैदा हो सकता है लेकिन जन्म की जगह उसके व्यक्तित्व की सबसे महत्वपूर्ण पहचान नहीं हो सकती। उनके लिए सबसे अहम बात यह है कि इंसान बड़ा होकर कैसा व्यक्ति बनता है और उसके व्यवहार में किस तरह की इंसानियत दिखाई देती है।

जावेद ने बताया कि फरहान और जोया को उन्होंने किसी धर्म से जोड़कर नहीं पाला। उनके दोनों बच्चे बड़े होते हुए खुद धर्म और समाज के बारे में समझने लगे लेकिन माता पिता की तरफ से उन पर किसी खास धार्मिक पहचान को अपनाने का दबाव नहीं था। जावेद के अनुसार उनके बच्चे किसी धार्मिक पहचान के बजाय अपनी सोच और अपने फैसलों के साथ बड़े हुए।

फरहान और जोया जावेद अख्तर और उनकी पहली पत्नी हनी ईरानी के बच्चे हैं। बाद में जावेद ने अभिनेत्री शबाना आजमी से शादी की। फरहान और जोया दोनों ने मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। फरहान अभिनेता निर्देशक निर्माता और लेखक के तौर पर सफल रहे हैं जबकि जोया अख्तर ने निर्देशन और लेखन के क्षेत्र में अपनी खास जगह बनाई है।

जावेद अख्तर अपने बच्चों की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फरहान और जोया ने अपनी सफलता के लिए किसी तरह का समझौता नहीं किया। उनके मुताबिक दोनों ने नाम शोहरत और पैसा हासिल करने के लिए ऐसा काम नहीं किया जिससे उनकी गरिमा प्रभावित हो। उन्होंने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई और अपने करियर में लगातार आगे बढ़े।

जावेद अख्तर का यह किस्सा सिर्फ फरहान के बचपन से जुड़ी एक याद नहीं बल्कि बच्चों की परवरिश को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखता है। उन्होंने धार्मिक पहचान को बच्चों पर थोपने के बजाय उन्हें खुद सवाल पूछने समझने और अपनी सोच विकसित करने की आजादी दी। फरहान का बचपन में पूछा गया छोटा सा सवाल और पिता का जवाब आज भी जावेद अख्तर की विचारधारा की एक खास झलक देता है।

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