March 8, 2026

'इक्कीस' देखने के बाद यूजर्स ने दिए रिएक्शन, धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म को लेकर कही ये बात

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नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की बायोपिक है, जिन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में मात्र 21 साल की उम्र में शहादत दी थी। फिल्म में अरुण खेत्रपाल का किरदार अगस्त्य नंदा ने निभाया है, जबकि सिमर भाटिया, जयदीप अहलावत और धर्मेंद्र ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन हैं।

यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया

फिल्म देखने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों ने अपने विचार साझा किए। कई यूजर्स ने इसे इमोशनल वॉर ड्रामा करार दिया। एक यूजर ने लिखा कि ‘इक्कीस’ उम्मीद से बेहतर है और यह फिल्म दिल को छू जाती है। कई दर्शक इसे शांतिवाद और राष्ट्रवाद का संतुलन पेश करने वाली फिल्म मान रहे हैं। एक अन्य यूजर ने कहा कि यह फिल्म 2026 के लिए बॉलीवुड में एक सफल शुरुआत साबित होगी।

कहानी और संदेश की तारीफ

यूजर्स ने फिल्म की कहानी और संदेश की जमकर तारीफ की। कई ने लिखा कि धुरंधर जैसी फिल्म के बाद ‘इक्कीस’ की तरह की कहानी आनी चाहिए थी जो युद्ध की हिंसा और राष्ट्रवाद को संतुलित दृष्टिकोण से दिखाती है। फिल्म के शांतिवादी संदेश ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया।

कलाकारों की अदाकारी की सराहना

धर्मेंद्र की अंतिम अदाकारी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। यूजर्स ने लिखा कि मुश्किल शेड्यूल और थकान के बावजूद धर्मेंद्र जी ने हमेशा की तरह अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। साथ ही अगस्त्य नंदा और अन्य कलाकारों की प्रदर्शन क्षमता की भी जमकर तारीफ की गई। दर्शकों का कहना है कि फिल्म में नए कलाकारों ने असली भावना और कहानी को पूरी तरह जीवंत किया।

फिल्म का निर्देशन और तकनीकी पक्ष

श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी यह फिल्म न केवल कहानी बल्कि विजुअल और तकनीकी दृष्टि से भी प्रभावशाली मानी जा रही है। युद्ध की घटनाओं और भावनाओं को पर्दे पर सटीक तरीके से पेश करने के लिए फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और निर्देशन की भी खूब सराहना हुई।

दर्शकों का समग्र अनुभव

यूजर्स के अनुसार ‘इक्कीस’ एक ऐसी फिल्म है जो भावनाओं से भरपूर, प्रेरक और सोचने पर मजबूर करने वाली है। युद्ध और शांति के बीच संतुलन, युवा वीरों की कहानी और धर्मेंद्र की अंतिम अदाकारी ने फिल्म को यादगार बना दिया। फिल्म के हर दृश्य में वास्तविकता और भावना की झलक है जो दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखती है।

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