July 11, 2026

OTT से हटने के बाद गुरुद्वारों तक पहुंची दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’, पांच राज्यों में कम्युनिटी स्क्रीनिंग की तैयारी, जसवंत सिंह खालरा की कहानी फिर बनेगी चर्चा का केंद्र

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नई दिल्ली । दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर चर्चा में है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद अब इस फिल्म को देश के विभिन्न गुरुद्वारों में सामुदायिक स्क्रीनिंग के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। सिख धार्मिक संस्थाओं की इस पहल का उद्देश्य मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना बताया जा रहा है। इसके तहत पंजाब के साथ हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू में भी विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करने की योजना बनाई गई है।

फिल्म के प्रदर्शन को लेकर कई गुरुद्वारा प्रबंधन समितियां एकजुट होकर कार्यक्रम तैयार कर रही हैं। जम्मू में 10 से 13 जुलाई के बीच अलग-अलग गुरुद्वारों में स्क्रीनिंग का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जबकि जयपुर में भी विशेष आयोजन की तैयारी की गई है। दिल्ली में भी सिख समुदाय से जुड़े संगठन इस पहल का समर्थन कर रहे हैं और फिल्म को फिर से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि फिल्म डिजिटल माध्यम पर उपलब्ध नहीं है तो सामुदायिक स्तर पर लोगों को इसे देखने का अवसर मिलना चाहिए।

सामुदायिक संगठनों का मानना है कि जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित यह कहानी केवल एक फिल्म नहीं बल्कि इतिहास और मानवाधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को सामने लाने का माध्यम है। उनका कहना है कि किसी भी कारण से यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसकी पहुंच सीमित हो जाती है तो समाज के स्तर पर ऐसे प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि यह कहानी लोगों तक पहुंचती रहे। इसी सोच के साथ विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं स्क्रीनिंग की तैयारियों में जुटी हैं।

फिल्म का सफर भी काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद इसे प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर बदलाव और कटौती के सुझावों का सामना करना पड़ा। शुरुआती चरण में फिल्म का शीर्षक बदला गया और कई संशोधनों की बात सामने आई। बाद में समीक्षा प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में अतिरिक्त बदलाव सुझाए गए, जिनमें प्रमुख पात्र से जुड़े परिवर्तन भी शामिल थे। फिल्म निर्माताओं ने इन संशोधनों को स्वीकार नहीं किया, जिसके चलते इसकी रिलीज लंबे समय तक टलती रही।

इसके बाद फिल्म का संस्करण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया, लेकिन रिलीज के कुछ ही समय बाद इसे हटा दिया गया। इस फैसले के बाद कई सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। फिल्म को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, ऐतिहासिक विषयों की प्रस्तुति और सार्वजनिक पहुंच जैसे मुद्दों पर भी चर्चा तेज हो गई। इस बीच अब गुरुद्वारों में होने वाली सामुदायिक स्क्रीनिंग ने फिल्म को एक नया मंच प्रदान कर दिया है।

हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओल्यान प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं। सामुदायिक स्क्रीनिंग की इस पहल से फिल्म एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है और आने वाले दिनों में इसके जरिए बड़ी संख्या में दर्शकों तक इसकी कहानी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

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