शिमला से मुंबई तक का यादगार सफर, 45 साल बाद अनुपम खेर ने शहर को कहा धन्यवाद, साझा की संघर्ष की कहानी
अनुपम खेर ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वह पहली बार मुंबई पहुंचे थे, तब उनके पास संसाधन बेहद सीमित थे, लेकिन सपने बहुत बड़े थे। जीवन में कुछ कर दिखाने की चाह और अभिनय के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी थी। उन्होंने माना कि मुंबई ने उन्हें अवसर तो दिए ही, साथ ही ऐसे संघर्ष भी दिए जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाया और उन्हें जीवन की वास्तविकताओं से परिचित कराया।
अभिनेता के अनुसार, सफलता का सफर कभी आसान नहीं होता और मुंबई जैसे बड़े शहर में अपनी पहचान बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि इस शहर ने उन्हें धैर्य, अनुशासन और निरंतर प्रयास का महत्व सिखाया। यहां मिलने वाली चुनौतियों ने उन्हें हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने यह भी कहा कि असफलताओं ने उन्हें टूटने नहीं दिया, बल्कि हर बार और अधिक मजबूत बनाकर आगे बढ़ाया।
मुंबई के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए अनुपम खेर ने कहा कि यह शहर हर व्यक्ति को अपनाने की क्षमता रखता है। चाहे कोई किसी भी पृष्ठभूमि से आता हो, यदि उसके भीतर मेहनत करने का जज्बा और अपने सपनों को पूरा करने की लगन है तो मुंबई उसे आगे बढ़ने का अवसर जरूर देती है। यही विशेषता इस शहर को दुनिया के अन्य महानगरों से अलग बनाती है।
उन्होंने अपने लंबे सफर के दौरान मिले अनुभवों का भी जिक्र किया। अभिनेता ने कहा कि यहां की भागदौड़, लोगों की मेहनत और रोजमर्रा का जीवन लगातार प्रेरणा देने वाला रहा है। शहर की सड़कों से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक, हर जगह उन्होंने जीवन के अलग-अलग रंग देखे और उनसे सीख हासिल की। यही अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय और व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बने।
अनुपम खेर ने यह भी स्वीकार किया कि अभिनय जगत में मिली सफलता के पीछे केवल व्यक्तिगत प्रयास ही नहीं, बल्कि मुंबई का सहयोग और यहां का माहौल भी बड़ी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि यह शहर लोगों को सपने देखने की हिम्मत देता है और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष करने का साहस भी प्रदान करता है।
अपने 45 वर्षों के सफर को याद करते हुए अभिनेता ने कहा कि आज भी वह खुद को सीखने की प्रक्रिया में मानते हैं। उनके अनुसार जीवन में सीखने और आगे बढ़ने की यात्रा कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने मुंबई को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस शहर ने उन्हें पहचान, सम्मान और जीवन को समझने का अवसर दिया। यही कारण है कि इतने वर्षों बाद भी उनका इस शहर से जुड़ाव पहले की तरह मजबूत और भावनात्मक बना हुआ है।
