# भिक्षा सूत्र: आज बात मांगने की…
@डॉ.आशीष द्विवेदी की कलम से…

बिन मांगे मोती मिलें, मांगे मिले न भीख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस संसार में एक विचित्र किंतु सत्य जीव हैं। पिछले साल भर से वो मेंढक की तरह टर्र- टर्र कर रहे हैं- मैं शांति का मसीहा हूं, अग्रदूत हूं, पुजारी हूं। इस विश्व में शांति के जितने कपोल मैंने उड़ाए हैं संभवतः किसी और ने नहीं, न भूतो न भविष्यति। जाने कितने युद्ध मेरी मध्यस्थता से रुके हैं, अन्यथा विनाश आ जाता, सैलाब उमड़ पड़ता। इसलिए मुझे शांति का नोबेल दीजिए। दुनिया के चौधरी बने इस ‘ महात्मा ‘ ने विश्व भर के मंचों से इतनी बार नोबेल की रट लगाई कि आप उफ कर बैठें। यह सारा परिदृश्य देख मुझे संत कबीरदास का एक प्रसिद्ध दोहा स्मरण हो आया।
बिन मांगे मोती मिले,
मांगे मिले न भीख।
मांगन से मरना भला,
यह सतगुरु की सीख।
कबीरदास जी कहते है कि बिना मांगे हमें जो कुछ मिलता है, वह मोती के समान होता है, लेकिन जब हम मांगते हैं तो हमें केवल भीख मिलती है। सतगुरु ने सीख दी है कि मांगने से बेहतर है मरना। इसका अर्थ यह है कि मांगने से हमारी आत्मा की गरिमा और स्वाभिमान दोनों खत्म हो जाता है, इसलिए अपने आत्मसम्मान को बनाए रखें।
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हमें याद रखना चाहिए कि कोई सम्मान मांगने से नहीं मिलता अपितु उसके लिए योग्यता चाहिए होती है, आप बस अपना कर्म खामोशी से करते बैठे रहिए , कोई न कोई, कहीं न कहीं उसका मूल्यांकन कर ही रहा होता है। समय आने पर आपको बगैर कहे वह मंच भी मिलेगा, सम्मान के हकदार भी होंगे। जो कोई अपने मुख से मांगकर सम्मान की कामना करता है वो अपने को और बौना कर लेता है।
सूत्र यह है कि जीवन में बिन मांगे तो आप मोती प्राप्त कर सकते हैं किंतु जैसे ही आप मांगने की मुद्रा में आएंगे तो भिक्षा ही प्राप्त होगी कुछ और नहीं। डोनाल्ड ट्रम्प इसकी जीवित मिसाल हैं। उन्होंने अपनी वैश्विक किरकिरी करा ली।
शुभ मंगल
# भिक्षा सूत्र
