# स्वप्न सूत्र: इन्हें पूरा कीजिए वरना…
@डॉ.आशीष द्विवेदी की कलम से…

नमस्कार,
आज बात अपने सपनों की…
इन्हें पूरा कीजिए वरना कोई और काम पर रख लेगा
सपने हम सब देखते हैं, देखना भी चाहिए। जीवन में हम क्या बनना चाहते हैं, क्या करना चाहते हैं? कौन सा मुकाम हासिल करने की इच्छा है? यह शायद एक समय सभी के मन- मस्तिष्क ( यदि वह स्वस्थ हो तो ) में होती ही है। कोई साहित्य में तो कोई राजनीति में तो कोई व्यापार में अपने झंडे गाड़ना चाहता है। कोई सिनेमा जगत तो कोई खेलों की दुनिया में परचम फहराने की आकांक्षा रखता है। कोई समाजसेवा में तो कोई किसी अन्य कला क्षेत्र में।
अपने सपने पूरा करने के लिए पूर्ण निष्ठा और समर्पण भाव से लगना होता है। किंतु बहुतेरे ऐसे होते हैं जो अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते, या प्रयास ही नहीं करते बीच में ही समर्पण कर देते हैं। कभी जाना है कि ऐसे लोगों का क्या सिला होता है। दरअसल इस प्रजाति के लोगों को कोई और काम पर रख लेता है, अपने सपनों को पूरा करने के लिए। इस संसार में दो प्रजाति के लोग हैं । एक वह जो किसी भी कीमत पर अपने सपनों को पूरा करके ही दम लेते हैं और दूसरे वो जो किसी के सपने पूरे करने के लिए उनके अधीनस्थ हो जाते हैं।
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टाटा, अंबानी, अडानी जैसे कारोबारियों ने अपने सपनों को पूरा करने लाखों लोगों को काम पर रख लिया, क्या उन सबके सपने न होंगे? दरअसल इस संसार में सच्चा पराक्रमी और पुरुषार्थी वही है जिसने अपने सपनों को मूर्त रूप दिया, उन्हें उड़ान दी। अपने सपनों को जो यथार्थ में परिवर्तित कर दे वही सच्चे अर्थों मे प्रतापी है। एक सपना महामना मदनमोहन मालवीय ने देखा और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का निर्माण कर दिया, एक ऐसा ही सपना हमारे सागर के दानवीर डाॅ. सर हरी सिंह गौर ने देखा और महान गुरुकुल बना दिया।
सूत्र यह है कि या तो आप अपने सपनों को पूरा करने में जुट जाइए अन्यथा किसी और के सपने पूरे करने का काम करना पड़ेगा। जिसमें जय-जयकार किसी और की होगी आप सिर्फ तालियां बजाएंगे और कुछ नहीं।
शुभ मंगल
# स्वप्न सूत्र
