April 23, 2026
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– प्रो. मनोज कुमार

शिक्षा की महती जवाबदारी समाज की है. सरकार शिक्षा के संसाधन उपलब्ध कराती है, अवसर देती है और अपने स्तर पर प्रयास करती है कि कोई बच्चा स्कूल जाने से ना छूटे. इसके बाद जवाबदारी आती है समाज की अर्थात हम-सब की कि बच्चों को स्कूल तक पहुँचायें. बच्चा का अर्थ केवल अपना बच्चा नहीं है बल्कि वह अपने आसपास का बच्चा भी है. आपके घर में सफाई करने वाली, बर्तन-कपड़ा धोने वाली दीदी होंगी, आपके घर में ड्रायवर भी होगा और अन्य सहायता करने वाले लोग भी आसपास होंगे और इनके बच्चे भी होंगे. कुछ अपने बच्चों को स्कूल भेजते होंगे और कुछ नहीं भेजते होंगे. ऐसे परिवारों को उनके बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित करना हम-सब की सामाजिक एवं नैतिक जवाबदारी है. नवीन शिक्षा सत्र से चार दिनों का ‘स्कूल चलें हम’ उत्सव आरंभ हो गया है. यही चार दिन बच्चों का भविष्य तय करने के लिए अर्थवान है. शिक्षकों की भी जवाबदारी बढ़ गई है कि वे नौनिहालों को किताब की ओर आकर्षित करें. ध्यान रखना होगा कि स्कूल सीखने और समझने की जगह है और ऐसे में शिक्षकों को स्नेह के साथ बच्चों के मन को जीतना होगा.

मध्यप्रदेश में अब सरकारी स्कूल सुविधाहीन नहीं हैं और ना ही निजी स्कूलों से कमतर. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और वोकेशनल कोर्स के साथ पीएमश्री योजना के तहत सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाया जा रहा है या यों कहें कि इस दिशा में काफी कुछ कार्य सरकार ने पूर्ण कर लिया है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. मिसाल के तौर पर पीएम श्री योजना के अंतर्गत 799 शासकीय विद्यालयों को स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला और लाइब्रेरी के साथ अपग्रेड किया गया है। साथ ही उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए सक्रिय अभ्यास क्रियाविधि का उपयोग किया जा रहा है, जो विज्ञान और सामाजिक विज्ञान को इंटरैक्टिव बनाता है। स्कूलों में कौशल विकास के लिए व्यावसायिक कोर्स (जैसे ब्यूटीशियन, सिलाई) भी शुरू किए गए हैं। स्कूली शिक्षा का नया शैक्षणिक सत्र 2026-27, 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है जिसमें ‘स्कूल चलें हम’ अभियान के तहत बच्चों का स्वागत, नि:शुल्क पुस्तकें वितरण और पहले दिन से ही पढ़ाई शुरू की गई है। ‘स्कूल चलें हम’ अभियान में नामांकन और पढ़ाई पर फोकस रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 92 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में 85 लाख से अधिक छात्रों का स्वागत किया जाएगा और मुफ्त किताबें वितरित की गई।

‘स्कूल चलें हम’ अभियान को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर बच्चे की रूचि स्कूल आने में हो. अभियान के दूसरे दिन ‘भविष्य से भेंट’ कार्यक्रम में अपने-अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों से नवागत विद्यार्थियों की भेंट होगी. विद्यार्थी उनकी सफलता के बारे में सवाल करेंगे. यह प्रयास विद्यार्थियों को भविष्य में क्या बनना है, के प्रति पे्ररित करेगा. विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ी, साहित्यकार, कलाकार, मीडिया, संचार मित्रों, पुलिस अधिकारी, राज्य शासन के अधिकारी बच्चों को पढ़ाई के महत्व और प्रेरणादायी कहानियां सुना कर उन्हें प्रेरित करेंगे। प्रत्येक जिले के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को किसी एक शाला में जाकर एक कालखण्ड में बच्चों के साथ सुरूचिपूर्ण ढंग से संवाद करने के लिये भी कहा गया है

अभियान का तीसरा तीन सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियों का होगा. पालकों को अपनापन लगे और वे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए दूसरों को प्रेरित करें, इस ध्येय के साथ उत्कृृष्ट उपस्थिति वाले विद्यार्थियों के पालकों को सम्मानित किया जाएगा. यह अपने आप में अनोखी पहल होगी. अभियान के अंतर्गत 3 अप्रैल को शाला स्तर पर पालकों के साथ सांस्कृतिक एवं खेल-कूद की गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। इसका उद्देश्य पालकों का विद्यालय से जोडऩा है। इसी दिन शाला में उपस्थित पालकों को शैक्षणिक स्टॉफ द्वारा राज्य सरकार की स्कूल शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जायेगी।

अभियान के अंतिम दिन ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल लाने के लिए विशेष पहल और विशेष शिक्षण सहायता की रूपरेखा से अवगत कराया जाएगा. अभियान के अंतिम दिन 4 अप्रैल को ऐसे छात्रों को चिन्हित किया जायेगा, जो किन्हीं वजहों से कक्षोन्नति प्राप्त करने में असफल हो गये हैं। पालकों को इन बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिये समझाइश दी जायेगी। उन्हें बताया जायेगा कि असफल होने के बाद भी लगातार प्रयास से अच्छा भविष्य तैयार किया जा सकता है। इसमें हम-सब सहायता कर सकते हैं. शिक्षा पर सबका अधिकार है, यह बात अधिकतम लोगों तक पहुंचाने की जवाबदारी हमें ही लेना होगी. सरकार पर आश्रित रहने से कुछ खास बदलाव होने वाला नहीं है. सरकार अपने स्तर पर प्रयास करती है लेकिन इन प्रयासों को सफलता तक पहुँचाने की जवाबदारी समाज की होती है. सरकार ने एक कोशिश कर स्कूलों के ढाँचे को सुदृढ़ करने की कोशिश की है. शासकीय स्कूल नए साज-सज्जा के साथ निजी स्कूलों के टक्कर में खड़े हो गए हैं फिर वह पीएमश्री स्कूल हो या सांदीपनी स्कूल. एक बड़ी सोच के साथ कम बजट में बेहतर शिक्षा देने की पहल हो चुकी है और इस पहल को आगे बढ़ाने की जवाबदारी उठाने के लिए हम-सबको आगे आना होगा.

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