अजब गजब उत्तराखंड: तिहाड़ में दम तोड़ चुके व्यक्ति को ‘जिंदा’ दिखाकर बेची 24 बीघा जमीन
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‘मुर्दे’ ने की करोड़ों की रजिस्ट्री: भू-माफिया के दुस्साहस की पराकाष्ठा
देहरादून की तहसील विकासनगर क्षेत्र के मौजा बड़ोंवाला से जमीनी धोखाधड़ी का एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था और रजिस्ट्री विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ तिहाड़ जेल में दम तोड़ चुके एक व्यक्ति को ढाई महीने बाद ‘जिंदा’ दिखाकर उसकी करोड़ों की कीमती जमीन की फर्जी रजिस्ट्री करा दी गई।
तारीख और खेल: कागजों में कैसे रची गई साजिश
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस मामले में बडोवाला परगना की विकासनगर तहसील स्थित भूमि के मूल खातेदार स्वर्गीय निर्मल सिंह की मृत्यु हो जाने की जानकारी होने के बावजूद, उनके नाम पर एक फर्जी व्यक्ति को खड़ा किया गया। इसके बाद फर्जी और कुटरचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करते हुए भूमि का विक्रय कर दिया गया। इस शातिर षड्यंत्र में कई लोग शामिल रहे हैं। अपूर्व जोशी (पुत्र: स्वर्गीय जे०पी० जोशी, निवासी: मिलन विहार, जीएमएस रोड, देहरादून) की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
चौंकाने वाला सच: दस्तावेजों में बेनकाब हुआ फरेब
असलियत यह है कि जमीन के असली मालिक निर्मल सिंह की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन भू-माफियाओं ने इस सच को दरकिनार कर मृत व्यक्ति को कागजों में जिंदा दिखा दिया
बड़ा सवाल: जब असली खातेदार इस दुनिया में नहीं था, तो रजिस्ट्री दफ्तर में उसकी जगह कौन खड़ा हुआ? किसकी फिंगरप्रिंट लिए गए और किसके नाम पर तस्वीरें खिंचवाई गईं? यह प्रशासनिक और निबंधन कार्यालय की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
मुकदमा: इन आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ
इस महाफर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुख्य रूप से निम्नलिखित नामजद
आरोपियों के नाम सामने आए हैं
आशीष कुमार राठौर (पुत्र: सुभाष चंद्र राठौर, निवासी: बरोटीवाला, विकासनगर, देहरादून)
राहुल चौहान (पुत्र: गोविन्द चौहान, निवासी: अमन विहार, सहस्रधारा रोड, देहरादून)
शुभम (पुत्र: जीत सिंह, निवासी: कुआँ वाला, हरबर्टपुर, देहरादून)
साहिल अली खान (पुत्र: कमरुद्दीन, निवासी: शिमला बाईपास रोड, गोरखपुर, देहरादून)
मो० कासिम (पुत्र: मोबिन व अन्य) के रूप मै हुई
भू-माफिया का खतरनाक तंत्र: व्यवस्था की आँख में धूल
यह घटना केवल एक जमीन का फर्जीवाड़ा नहीं है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भू-माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं। बिना किसी डर के, एक मृत व्यक्ति के नाम पर इतना बड़ा खेल खेल जाना बिना किसी आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस महाफर्जीवाड़े के पीछे प्रॉपर्टी डीलरों, फर्जी गवाहों और प्रशासनिक तंत्र के भ्रष्ट चेहरों का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। यह मामला उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। अगर ‘मुर्दों’ के नाम पर भी जमीनें लूटी जाने लगेंगी, तो आम आदमी का सिस्टम से भरोसा उठ जाएगा। जरूरत इस बात की है कि इस गिरोह के पीछे बैठे सफेदपोशों और मास्टरमाइंड को बेनकाब कर ऐसी सख्त सजा दी जाए जो एक नजीर बने।
