जब सड़कें और पुल बह गए तो हाथियों ने संभाली जिम्मेदारी, अरुणाचल के बाढ़ प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाने की बनी अनोखी जीवनरेखा
बाढ़ का सबसे अधिक असर नारी-कोयू विधानसभा क्षेत्र के कोयू सर्कल के गांवों पर पड़ा है। यहां सड़क संपर्क टूटने के कारण सामान्य वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। कई गांवों तक न तो खाद्यान्न पहुंच पा रहा था और न ही दवाइयों तथा ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति संभव हो रही थी। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का संकट गहराने लगा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय समुदाय के सहयोग से हाथियों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की। हाथियों की पीठ पर राशन, दवाइयां, ईंधन और अन्य जरूरी सामान लादकर उन रास्तों से भेजा जा रहा है, जहां वाहन तो दूर, कई स्थानों पर पैदल पहुंचना भी बेहद कठिन है। पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप चलने की उनकी क्षमता राहत कार्यों में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
यह अभियान आसान नहीं है। हाथियों को तेज बहाव वाली नदियों, कीचड़ से भरे रास्तों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी मार्गों और बड़े-बड़े पत्थरों के बीच कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इसके बावजूद राहत कार्य लगातार जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी गांव में आवश्यक वस्तुओं की कमी न होने पाए और सभी प्रभावित परिवारों तक समय पर मदद पहुंच सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाथियों की सहायता नहीं ली जाती तो कई गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह बह चुकी हैं और अस्थायी रास्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में हाथी ही एकमात्र भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरे हैं, जिनकी मदद से लगातार राहत सामग्री गांवों तक पहुंच रही है। इससे सैकड़ों लोगों को भोजन, दवा और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वैकल्पिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग किस तरह राहत कार्यों को गति दे सकता है, इसका यह उदाहरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के साथ ग्रामीणों की भागीदारी और प्रशिक्षित हाथियों का सहयोग राहत अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकता है।
अरुणाचल प्रदेश में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत की दिशा में भी काम शुरू किया गया है, ताकि जल्द से जल्द गांवों का संपर्क फिर से स्थापित हो सके। तब तक हाथियों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने का यह अभियान प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद की सबसे मजबूत कड़ी बना हुआ है। यह पहल केवल राहत वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन समय में मानव, स्थानीय समुदाय और प्रकृति के बीच सहयोग की प्रेरक मिसाल भी प्रस्तुत करती है।
