September 10, 2026

विजय माल्या बोले- कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद उनकी जिंदगी बेहतर है

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नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी स्थिति की तुलना ‘कॉकरोच’ से करते हुए कहा है कि शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर होती है। माल्या का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन चर्चा में है। माल्या ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को कथित अन्याय से जोड़ते हुए यह टिप्पणी की है।

माल्या ने एक्स पर क्या लिखा?
माल्या ने एक्स पर लिखा, “मैंने जितनी भी नाइंसाफियां झेली हैं और झेल रहा हूं, उन्हें देखते हुए सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो।”

माल्या लंबे समय से अपने खिलाफ हुई कार्रवाई और लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया पोस्ट में भी उन्होंने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई और दावा किया कि ब्रिटेन के कानूनी प्रतिबंधों के चलते वह वहां से बाहर नहीं जा सकते।

‘कॉकरोच’ शब्द से शुरू हुआ व्यंग्यात्मक आंदोलन

2026 में ‘कॉकरोच’ शब्द सोशल मीडिया की राजनीति में एक अलग प्रतीक के तौर पर सामने आया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP की शुरुआत व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में हुई थी। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके हैं। आंदोलन के जरिए बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे उठाए गए।

CJP के नाम को उस समय ज्यादा चर्चा मिली, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से कुछ बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। आंदोलन से जुड़े लोगों ने ‘कॉकरोच’ शब्द को अपमान के बजाय व्यंग्यात्मक पहचान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

इसके बाद आंदोलन सोशल मीडिया से आगे बढ़कर सड़क पर भी दिखाई दिया और शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए गए। जुलाई में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भी आंदोलन से जुड़े दबाव के संदर्भ में बताया गया है।

विजय माल्या पर क्या मामले हैं?

विजय माल्या कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में गिने जाते थे। वह यूनाइटेड ब्रुअरीज समूह से जुड़े रहे और किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमोटर थे। एयरलाइन के वित्तीय संकट के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया सामने आया।

माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बकाये से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। भारत सरकार उनकी वापसी के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया भी चला रही है।

संपत्तियों को लेकर माल्या का दावा

माल्या का कहना है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई में उनके साथ अन्याय हुआ है। हालिया बयानों में उन्होंने दावा किया है कि उनकी संपत्तियों से बैंकों और एजेंसियों ने उनकी देनदारी से अधिक रकम वसूल की है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, माल्या ने दावा किया कि करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जबकि वह अपनी देनदारी करीब 6,203 करोड़ रुपये बताते हैं। ये आंकड़े माल्या के दावे के तौर पर ही देखे जाने चाहिए, अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।

अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की संपत्तियों की जब्ती और बैंक रिकवरी से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद को खत्म करने की जरूरत पर टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। माल्या के वकील ने अदालत में दावा किया था कि बैंकों ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है।

CJP से जुड़े विवाद भी जारी

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ हाल के दिनों में भी सक्रिय रही है। सितंबर में इसके समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने तक मार्च किया और एक प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग की।

9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से CJP के प्रदर्शन में शामिल एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मामले में प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही।

इसी बीच CJP से जुड़ा एक और कानूनी विवाद सामने आया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने CJP, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।

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