March 9, 2026

दिल्ली की सेहत पर खतरा: 2024 में सांस की बीमारियों से 9,211 मौतें

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नई दिल्ली । दिल्ली सरकार द्वारा जारी 2024 की ताजा हेल्थ रिपोर्ट राजधानी की सेहत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में जहरीली हवा और बिगड़ते पर्यावरण का सीधा असर नागरिकों के फेफड़ों पर पड़ रहा है। साल 2024 में सांस संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़कर 9,211 तक पहुंच गया है, जो कि 2023 में 8,801 था। विशेषज्ञों ने इस वृद्धि को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक ‘रेड सिग्नल’ माना है और वायु गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में मौतों का सबसे बड़ा कारण दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां बनकर उभरी हैं। साल 2024 में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और धमनियों में रुकावट जैसी समस्याओं के कारण 21,262 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि पिछले साल यह संख्या 15,714 थी। एक ही साल में हृदय रोगों से होने वाली मौतों में आई यह भारी उछाल बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय तनाव की ओर इशारा करती है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि संक्रामक और परजीवी रोगों से होने वाली मौतों में कमी आई है। 2023 में जहां इन बीमारियों से 20,781 मौतें हुई थीं, वहीं 2024 में यह घटकर 16,060 रह गईं, जो सार्वजनिक स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए सुधारों का परिणाम माना जा रहा है।

शिशु स्वास्थ्य के मोर्चे पर दिल्ली ने मामूली लेकिन सकारात्मक प्रगति की है। राजधानी में शिशु मृत्यु दर 2023 के 23.61 से घटकर 2024 में 22.4 प्रति हजार रह गई है। यह गिरावट प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और टीकाकरण की सफलता को दर्शाती है। इसके साथ ही, एक और उत्साहजनक आंकड़ा यह सामने आया कि दिल्ली में 5 वर्ष से कम उम्र के 99.1 प्रतिशत बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र मौजूद है, जो नागरिक पंजीकरण प्रणाली की मजबूती का प्रतीक है।

आबादी के मोर्चे पर रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली का विस्तार तेजी से हो रहा है और अनुमान है कि 2036 तक राजधानी की जनसंख्या 2.65 करोड़ तक पहुंच जाएगी। साल 2024 में कुल 3,06,459 जन्म दर्ज किए गए, जबकि कुल मौतों की संख्या 1,39,480 रही। मृत्यु दर में 6.16 से 6.37 की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि बढ़ती आबादी और प्रदूषण के दोहरे दबाव के बीच दिल्ली को अपने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा।

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