March 9, 2026

संसदीय समिति के सामने जस्टिस वर्मा का पक्ष: कैश कांड में पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली। कैश कांड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने संसदीय समिति को अपना लिखित जवाब सौंप दिया है। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए महाभियोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। जस्टिस वर्मा का कहना है कि यदि प्रशासनिक एजेंसियां घटनास्थल को सुरक्षित रखने में विफल रहीं, तो इसकी जिम्मेदारी उन पर डालना न्यायसंगत नहीं है।

“घटनास्थल पर मैं सबसे पहले नहीं पहुंचा”

सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस वर्मा ने समिति को दिए जवाब में स्पष्ट किया कि वह घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले व्यक्ति नहीं थे। आग लगने जैसी गंभीर घटना में पुलिस और अन्य एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है कि वे तुरंत मौके को सील करें और सुरक्षा मानकों का पालन करें। उन्होंने कहा कि पुलिस ने न तो स्थल को सुरक्षित किया और न ही मानक प्रक्रिया का पालन किया, ऐसे में बाद की किसी भी चूक के लिए उन्हें दोषी ठहराना अनुचित है।

पुलिस और फायर ब्रिगेड की भूमिका पर सवाल

जस्टिस वर्मा ने अपने जवाब में यह भी कहा कि आग लगने के समय मौके पर पुलिस और फायर ब्रिगेड दोनों मौजूद थीं। इसके बावजूद घटनास्थल को सील नहीं किया गया और आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय किसी भी तरह की नकदी की औपचारिक बरामदगी नहीं की गई थी, जबकि बाद में नकदी मिलने की बात कही जा रही है। उनके अनुसार, जब घटनास्थल पूरी तरह से प्रशासनिक एजेंसियों के नियंत्रण में था, तो उसकी सुरक्षा में हुई चूक की जिम्मेदारी उन पर कैसे डाली जा सकती है।

महाभियोग प्रक्रिया को दी चुनौती

इन्हीं तर्कों के आधार पर जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने खिलाफ शुरू की गई महाभियोग प्रक्रिया और संसदीय समिति के गठन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में शीर्ष अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है। अब पूरे घटनाक्रम पर देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय की प्रतीक्षा है।

क्या है कैश कांड की पूरी कहानी

यह मामला मार्च 2025 में उस समय चर्चा में आया, जब दिल्ली के तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के एक स्टोर रूम में आग लग गई। 14 मार्च 2025 को लगी इस आग को बुझाने पहुंची फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम को वहां फर्श पर 500 रुपये के नोटों के जले और आंशिक रूप से जले बंडल दिखाई दिए थे। इसी घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी।

घटना के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने जांच के लिए तीन जजों की इन-हाउस समिति गठित की और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया। इसके बाद जुलाई 2025 में 140 से अधिक सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया, जिस पर अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तीन सदस्यीय संसदीय समिति का गठन किया।

अब जस्टिस यशवंत वर्मा के जवाब और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इस पूरे मामले की दिशा तय होगी।

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