गुजरात के केसर आम की खुशबू पहुंची लंदन, हीथ्रो एयरपोर्ट पर छाया भारतीय आमों का जलवा
निर्यात प्रक्रिया के दौरान आमों को विशेष तापमान वाले गर्म पानी में उपचारित किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार के कीट या फंगल संक्रमण को खत्म किया जा सके। इसके बाद उन्हें ठंडे पानी में रखा जाता है जिससे उनका प्राकृतिक रंग, ताजगी और संरचना बनी रहती है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही आमों को पैक करके विभिन्न देशों जैसे इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा और खाड़ी देशों में भेजा जाता है।
निर्यातकों के अनुसार, भारतीय आमों की सबसे बड़ी मांग केसर और हाफूस किस्म की होती है। इनकी सुगंध, मिठास और प्राकृतिक स्वाद दुनिया के अन्य देशों में मिलने वाले आमों से अलग और अधिक प्रभावशाली माना जाता है। यही कारण है कि भारतीय आम अब केवल एक फल नहीं बल्कि एक प्रीमियम वैश्विक उत्पाद बन चुके हैं।
लंदन और आसपास के क्षेत्रों में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह आम केवल स्वाद का हिस्सा नहीं बल्कि अपने देश की यादों से जुड़ा एक भावनात्मक संबंध भी है। वहीं स्थानीय यूरोपीय उपभोक्ता भी अब भारतीय आमों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जिससे इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह आधुनिक तकनीक और संगठित कृषि प्रणाली के साथ उत्पादन और निर्यात जारी रहा तो आने वाले वर्षों में भारत के कृषि उत्पाद वैश्विक बाजार में और भी मजबूत स्थिति हासिल करेंगे।
