June 7, 2026

बीएसएफ और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के बीच तनाव, भारतीय-विदेशी दस्तावेजों के अभाव में प्रवासी फंसे

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नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा पर इन दिनों एक असामान्य स्थिति देखने को मिल रही है, जहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जो लंबे समय से भारत में रह रहे थे और अब अपनी पहचान बताकर वापस बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता रहे हैं। यह पूरा मामला उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर चेकपोस्ट से सामने आया है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे हैं।

सीमा सुरक्षा बल सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अनुसार, इन लोगों की बायोमीट्रिक जांच और दस्तावेजों की पुष्टि की जा रही है, जिसके बाद उन्हें फिलहाल होल्डिंग सेंटरों में भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब स्थिति ऐसी बनी है कि अवैध प्रवासियों को खोजने की जरूरत नहीं पड़ रही, बल्कि लोग स्वयं सामने आकर अपनी पहचान दर्ज करा रहे हैं।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हकीमपुर बॉर्डर पर हर दिन लगभग 200 से 300 लोग वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से कई लोगों के पास भारतीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, लेकिन बांग्लादेश से जुड़े वैध पहचान पत्र नहीं हैं। इसी कारण उनके मामलों की जांच जटिल हो गई है और दोनों देशों के बीच प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया लंबी हो रही है।

इस बीच बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने आरोप लगाया है कि भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से कुछ लोगों को सीमा पार धकेलने की कोशिश की गई है, हालांकि BSF ने इन आरोपों को खारिज किया है। बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की अवैध घुसपैठ या वापसी की कोशिश पर सख्ती से नजर रखी जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई प्रवासियों की व्यक्तिगत कहानियां भी सामने आई हैं। बांग्लादेश के सातक्षीरा जिले के मो. खालिद गाजी ने बताया कि वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सीमा पर पहुंचे, लेकिन उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। उनका दावा है कि उन्हें दोनों तरफ से अस्वीकार किया गया और उन्हें BSF का जासूस बताकर वापस भेज दिया गया।

इसी तरह मुंबई में रह रहे मोहम्मद अख्तर शेख ने बताया कि वे करीब 22 साल पहले बांग्लादेश से भारत आए थे और उनके पास भारतीय आधार कार्ड तो है, लेकिन बांग्लादेश का कोई दस्तावेज नहीं है। उन्हें आशंका है कि अब वे किसी भी देश में पूरी तरह स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिससे उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।

मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी बॉर्डर से जुड़े एक अन्य व्यक्ति इस्लाम सरदार की कहानी भी सामने आई है, जिन्होंने कहा कि वे वर्षों से भारत में रह रहे हैं और अब अपने मूल देश लौटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वहां भी दस्तावेजों की कमी के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अपनी स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर बदलते हालात, प्रशासनिक सख्ती और पहचान सत्यापन की नई प्रक्रिया के चलते यह स्थिति बनी है। पश्चिम बंगाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि लंबे समय से रह रहे कई प्रवासी अब अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं।

हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत और सीमा प्रबंधन की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, सभी मामलों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं का संतुलन बना रहे।

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