March 12, 2026

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की 3 मई से गोरखपुर से शुरू होगी ‘गविष्ट यात्रा’, बनाएंगे ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’

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प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) ने घोषणा की है कि वह 3 मई से गोरखपुर से ‘गविष्ट यात्रा’ की शुरुआत करेंगे। यह अभियान 81 दिनों तक चलेगा और 23 जुलाई को गोरखपुर में ही इसका समापन होगा।
उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान टीमें उत्तर प्रदेश के गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगी और सनातन धर्म व गौसंरक्षण के मुद्दों पर संवाद करेंगी।

प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि इस यात्रा के माध्यम से राज्य के करीब 1.08 लाख गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने समर्थकों से टीम बनाकर गांव-गांव जाने और प्रमाण के साथ सच बात जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया।

अनुमति को लेकर लगाए आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई बाधाएं खड़ी की गईं। उनके अनुसार पहले काशी में कार्यक्रम रोकने की कोशिश हुई, फिर लखनऊ में प्रवेश को लेकर आपत्ति जताई गई और अंततः देर रात 16 शर्तों के साथ अनुमति दी गई, जिसके बाद 10 और शर्तें जोड़कर कुल 26 कर दी गईं।

‘शंकराचार्य पद सनातन धर्म का सुप्रीम कोर्ट’
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पद सनातन धर्म में सर्वोच्च स्थान रखता है। उनके मुताबिक यह व्यवस्था ज्ञान और परंपरा पर आधारित है, न कि भीड़तंत्र पर। उन्होंने गौसंरक्षण और सनातन धर्म की रक्षा को समाज की जिम्मेदारी बताते हुए संत समाज से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

‘कोई राजनीतिक दल नहीं बना रहे’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कोई राजनीतिक दल बनाना नहीं है।

उन्होंने कहा कि संत समाज जनता के बीच जाकर केवल यह संदेश देगा कि जो भी गौसंरक्षण और समाज के हित में काम करे, उसे ही समर्थन दिया जाना चाहिए।

अखाड़ों को लिखा जाएगा पत्र
उन्होंने कहा कि साधु समाज में आई कुछ विकृतियों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके लिए विभिन्न अखाड़ों को पत्र लिखकर उनकी भूमिका स्पष्ट करने को कहा जाएगा। साथ ही उन्होंने ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ बनाने की बात भी कही, जिसमें संन्यासी, बैरागी, उदासीन और गृहस्थ शामिल होंगे।

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