June 2, 2026

सूरत नवजात केस: तीसरी बार प्रेग्नेंट होने पर महिला ने नवजात को फेंका, CCTV से पहुंची पुलिस तक सच्चाई

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नई दिल्ली । गुजरात के सूरत शहर में एक नवजात शिशु के शव मिलने की घटना ने गंभीर चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय क्षेत्र में कचरे के ढेर से एक नवजात का शव बरामद हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध पाया गया, जिसके बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की कोशिश की गई।

जांच के दौरान पुलिस को एक महिला की गतिविधि संदिग्ध लगी, जो काले रंग की प्लास्टिक थैली लेकर इलाके में जाती दिखाई दी थी। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने अपनी जांच को आगे बढ़ाया और तकनीकी विश्लेषण तथा स्थानीय पूछताछ के जरिए महिला की पहचान की। कई दिनों की जांच के बाद पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सभी को चौंका दिया। महिला पहले से दो बच्चों की मां है और उसके दोनों बच्चे वयस्क हो चुके हैं। उसने स्वीकार किया कि वह तीसरी बार गर्भवती हो गई थी और इस स्थिति को लेकर वह मानसिक तनाव में थी। उसे डर था कि समाज में उसकी बदनामी होगी और लोग इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे। इसी डर और सामाजिक दबाव के कारण उसने नवजात को जन्म देने के बाद उसे काले प्लास्टिक बैग में डालकर कचरे में फेंक दिया।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में दुख और गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ते मानसिक दबाव और जागरूकता की कमी को भी दर्शाती हैं। कई सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में महिलाओं को उचित परामर्श और सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे किसी भी प्रकार के चरम कदम उठाने से बच सकें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और नवजात की मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना के समय परिस्थितियां क्या थीं और इसमें अन्य कोई पहलू तो शामिल नहीं है।

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव की गंभीर स्थिति को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सहायता तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समाज में ऐसे हालातों से जूझ रहे लोगों के लिए पर्याप्त समर्थन मौजूद है या नहीं। जांच आगे बढ़ने के साथ इस घटना से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।

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