यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा दांव, 10 सीटों पर मुकाबला रोचक; बीजेपी की आठवीं सीट और क्रॉस वोटिंग पर नजर
सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर लगातार चर्चा चल रही है। राज्यसभा उम्मीदवार रामगोपाल यादव से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तीन बजे तक नामांकन का समय है और फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव चाहेंगे तो तीसरा उम्मीदवार उतरेगा, नहीं तो नहीं उतरेगा। अखिलेश यादव मंगलवार को विपक्षी गठबंधन के विरोध मार्च में शामिल हुए। विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। ऐसे में नामांकन की समयसीमा खत्म होने तक यह स्पष्ट होना था कि सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है या नहीं।
सपा के तीसरे उम्मीदवार के नामांकन को लेकर यह भी दावा किया गया कि पार्टी ने जरूरी 10 विधायकों के हस्ताक्षर बतौर प्रस्तावक जुटा लिए हैं। तीसरे उम्मीदवार के नामांकन की स्थिति में 16 अक्टूबर को मतदान होना है और मुकाबला अतिरिक्त वोटों पर निर्भर हो सकता है। सपा पहले ही अपने वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस ग्रुप के सीईओ धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। दोनों उम्मीदवार अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। रामगोपाल यादव छठी बार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं।
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। विधानसभा में विधायकों की प्रभावी संख्या 397 बताई गई है। इस हिसाब से प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 मतों की जरूरत होगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 285 से 290 विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर बीजेपी के सात उम्मीदवारों की जीत आसान मानी जा रही है, लेकिन आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। दूसरी ओर सपा के पास 101 विधायक बताए गए हैं, जिससे उसके दो उम्मीदवारों की जीत संभव है। तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए सपा को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।
वोटों के इसी गणित के कारण क्रॉस वोटिंग को लेकर भी चर्चा है। बीजेपी के आठवें उम्मीदवार और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। कांग्रेस के दो विधायक सपा के खाते में बताए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी होगा। ऐसे में दोनों दलों के सामने अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती होगी। अंतिम दिन नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है या नहीं। यदि तीसरा उम्मीदवार उतरता है तो 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की संख्या बढ़ जाएगी और 16 अक्टूबर को मतदान की स्थिति बनेगी।
राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है। पार्टी के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है, जबकि तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारकर आठवीं सीट के लिए भी दावा पेश किया है। ऐसे में नामांकन की अंतिम समयसीमा तक दोनों दलों की रणनीति और विधायकों के समर्थन का गणित महत्वपूर्ण बना हुआ है। मतदान की स्थिति बनने पर क्रॉस वोटिंग भी चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने वाला अहम पहलू हो सकती है।
