March 8, 2026

निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की चर्चा तेज, पटना में लगे पोस्टर-“पार्टी की कमान संभालें निशांत”

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बिहार । की राजनीति इन दिनों एक नई हलचल के बीच है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की संभावित राजनीतिक एंट्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राजधानी पटना में जदयू कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
इन पोस्टरों पर लिखा है-
“अब पार्टी की कमान संभालें निशांत”
और
“नीतीश सेवक माँगें निशांत”।

हालाँकि, पार्टी की ओर से साफ़ कहा गया है कि राजनीति में आने या न आने का निर्णय निशांत को स्वयं करना होगा।

कैसे शुरू हुआ चर्चा का दौर?

पिछले शुक्रवार को जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस विषय को सार्वजनिक रूप से छेड़ा।
पटना एयरपोर्ट पर उन्होंने कहा:

“पार्टी सदस्य, समर्थक और शुभचिंतक चाहते हैं कि निशांत कुमार पार्टी में आएँ और सक्रिय भूमिका निभाएँ। निर्णय उनका अपना होगा।”

दिलचस्प बात यह रही कि बयान देते समय निशांत कुमार उन्हीं के साथ मौजूद थे, जिसने अटकलों को और मजबूत किया।

कौन हैं निशांत कुमार?

जन्म: 20 जुलाई 1975

माता-पिता: नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा

इकलौते बेटे

शिक्षा

स्कूली शिक्षा: सेंट केरन्स हाई स्कूल, पटना

आगे की पढ़ाई: मानव भारती इंटरनेशनल स्कूल, मसूरी

उच्च शिक्षा: बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा – सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग

2017 में दिया था राजनीति से दूर रहने का बयान
निशांत ने वर्ष 2017 में स्पष्ट कहा था कि उन्हें राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है।
उनके शब्दों में-

“मुझे राजनीति का ज्ञान नहीं और न ही रुचि। मेरा पहला प्यार आध्यात्म है और मैं उसी राह पर आगे बढ़ना चाहता हूँ।”

हालाँकि, इस साल जनवरी में वे बख्तियारपुर में एक कार्यक्रम में दिखाई दिए थे जहाँ उन्होंने अपने पिता के लिए समर्थन जुटाया-इसके बाद से ही उनकी संभावित एंट्री पर चर्चा फिर से तेज हो गई है।

जदयू का सदस्यता अभियान और फिर उठा मुद्दा

शनिवार को जदयू ने 2025–2028 के लिए सदस्यता अभियान की शुरुआत की।
शुरुआत खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पार्टी सदस्यता ग्रहण करने के साथ हुई।
इसके बाद संजय झा, वशिष्ठ नारायण सिंह, उमेश कुशवाहा सहित कई नेताओं ने सदस्यता ली।

इसी मौके पर संजय झा ने फिर से निशांत का जिक्र करते हुए कहा-

“फैसला निशांत का होगा, लेकिन अगर वे जदयू में शामिल होते हैं तो पार्टी के लिए यह सकारात्मक होगा।”

पटना में लगे पोस्टर, नेताओं के बयान और बढ़ती राजनीतिक हलचल यह संकेत दे रहे हैं कि जदयू के भीतर निशांत कुमार की भूमिका को लेकर उत्सुकता चरम पर है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नीतीश कुमार के इकलौते बेटे राजनीति में कदम रखते हैं या अपनी पुरानी आध्यात्मिक राह पर ही आगे बढ़ते हैं।

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