अस्पताल से सोनम वांगचुक का देश के नाम संदेश, ‘चलो संसद’ मार्च को बताया दूसरा आजादी आंदोलन, हिरासत और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ा विवाद
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि देश को अन्याय और भय से मुक्त बनाने के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है और इसी भावना के साथ 20 जुलाई के कार्यक्रम को व्यापक समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका संदेश अस्पताल से भेजा गया है, जहां उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया है।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से एक जनआंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल पर थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद से उनके स्वास्थ्य, इलाज और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। इस बीच उनके समर्थक भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।
दूसरी ओर, उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो ने वांगचुक को किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति देने की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि उन्हें वर्तमान अस्पताल की व्यवस्था पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक को परिवार, वकीलों और निजी चिकित्सकों से पर्याप्त रूप से मिलने नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है। याचिका में अस्पताल बदलने की अनुमति देने और मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध भी किया गया है।
गीतांजलि ने यह भी दावा किया कि अस्पताल की ओर से उन्हें बताया गया कि सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर काफी नीचे चला गया है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर स्थिति मानी जाती है। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से पूरी स्पष्टता के साथ साझा नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरण की अनुमति नहीं मिली है।
परिवार का कहना है कि अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे मुलाकात और सामान्य आवाजाही प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे सामान्य चिकित्सीय व्यवस्था के बजाय प्रतिबंधात्मक स्थिति बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है तो संबंधित प्रशासनिक पक्षों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। एक ओर आंदोलन के समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा अभियान बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और उनके अस्पताल में भर्ती रहने को लेकर कानूनी और प्रशासनिक पहलू भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई, चिकित्सकीय निर्णय और आंदोलन की दिशा इस मामले के आगे के घटनाक्रम को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
