CJP के वायरल जश्न वीडियो पर सोनम वांगचुक की नसीहत, सफलता के साथ जिम्मेदारी निभाने की दी सलाह
वांगचुक का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब सोशल मीडिया पर CJP के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के जश्न मनाने वाले वीडियो व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। वायरल वीडियो में पार्टी से जुड़े कुछ लोग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खुशी जाहिर करते और उत्सव मनाते दिखाई दे रहे हैं। इन दृश्यों को लेकर अलग-अलग वर्गों में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और इसे लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है।
सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी भी संघर्ष का उद्देश्य केवल लक्ष्य प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया में सामाजिक मूल्यों और नैतिक जिम्मेदारियों को भी बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार जीत तभी सार्थक मानी जाएगी जब उसमें विनम्रता और दूसरों के प्रति सम्मान भी दिखाई दे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी जन आंदोलन की विश्वसनीयता उसके समर्थकों के आचरण से भी तय होती है।
हाल के दिनों में वांगचुक CJP के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। बाद में उन्हें स्वास्थ्य कारणों से पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने 23 जुलाई को अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त की थी। यह निर्णय उस आश्वासन के बाद लिया गया, जिसमें प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने और NEET पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित सहायता देने की बात कही गई थी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामने आए जश्न के वीडियो पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे आंदोलन की सफलता पर युवाओं की स्वाभाविक खुशी बताया, जबकि कई अन्य लोगों ने इसे अनुचित समय पर किया गया उत्सव करार दिया। आलोचकों का कहना था कि आंदोलन की पृष्ठभूमि छात्रों की समस्याओं और परीक्षा प्रणाली से जुड़े गंभीर मुद्दों पर आधारित थी, इसलिए जश्न का स्वरूप अधिक संयमित होना चाहिए था।
इस बीच CJP की ओर से भी पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी गई। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वायरल वीडियो में युवाओं का उत्साह और उनकी अभिव्यक्ति का तरीका दिखाई देता है। उनके अनुसार नई पीढ़ी अपने विचार अलग-अलग माध्यमों से व्यक्त करती है और लोकतांत्रिक आंदोलनों में भागीदारी के तरीके समय के साथ बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि युवा सड़क पर बैठकर, सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से या अन्य रचनात्मक तरीकों से भी अपनी बात समाज के सामने रख सकते हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शुरू हुई इस बहस ने आंदोलन की शैली, सार्वजनिक व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर आंदोलन की उपलब्धियों पर समर्थकों में उत्साह दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कई लोग यह भी मान रहे हैं कि किसी भी लोकतांत्रिक सफलता का उत्सव संवेदनशीलता, संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाया जाना चाहिए।
