March 8, 2026

‘सर तन से जुदा’ नारा भारत की सम्प्रभुता के लिए चुनौती…

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इलाहाबाद हाईकोर्ट

– बरेली हिंसा जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के एक आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति या भीड़ द्वारा लगाया गया नारा “गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा” कानून के अधिकार के साथ-साथ भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए भी एक चुनौती है, क्योंकि यह लोगों को हथियारबंद विद्रोह के लिए उकसाता है। इसलिए, यह न केवल बीएनएस की धारा 152 के तहत दंडनीय होगा बल्कि इस्लाम के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी के साथ बरेली में सितंबर में हुई हिंसा में मौलाना तौकीर रजा के सहयोगी रेहान की जमानत अर्जी खारिज कर दी। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच ने जमानत अर्जी खारिज की. राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने जमानत अर्जी का विरोध किया।

अभियुक्त रेहान के खिलाफ बरेली कोतवाली थाने में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज है। जमानत अर्जी में कहा गया था कि उसे गलत तरीके से फंसाया गया है। अभियोजन के अनुसार इत्तेफाक मिन्नत काउंसिल अध्यक्ष मौलाना तौकीर रज़ा व नदीम खान ने मुस्लिम समुदाय को इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में इकट्ठा होकर राज्य के खिलाफ विरोध में प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। बीएनएस की धारा 163 निषेधाज्ञा के विपरीत अवैध जमावडे़ पर रोक के बावजूद 26 सितंबर 2025 को नमाज के बाद यहां इकट्ठा हुए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। नदीम खान के घर से भीड़ निकली और सरकार के खिलाफ नारे लगाए, जिसमें “गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा” शामिल था। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पुलिसकर्मियों की लाइनों को तोड़ दिया, उनकी यूनिफॉर्म फाड़ दी, और पेट्रोल बम, गोलीबारी और पत्थरबाजी की, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और कई पुलिस और निजी वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

कोर्ट ने ये कही बात
मौके से सात लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें वर्तमान अभियुक्त भी शामिल है। कोर्ट ने कहा, विभिन्न धर्मों में नारों और घोषणाओं की बात है। आमतौर पर लोग अपने धर्म के प्रति आदर और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए उपयोग में लाते हैं। मुस्लिम समुदाय में “नारा-ए-तकबीर” के बाद “अल्लाहु अकबर” है, जिसका अर्थ है कि भगवान सबसे महान हैं और इसमें कोई विवाद नहीं है। इसी तरह, सिख धर्म में “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” कहते हैं, यह नारा गुरु गोबिंद सिंह ने लगाया था। यह भगवान को अंतिम सत्य के रूप में स्वीकार करता है। हिंदू धर्म में भी “जय श्री राम” या “हर हर महादेव” जैसे नारे खुशी और आनंद के अवसरों पर उपयोग किए जाते हैं। इन नारों का उपयोग तब तक अपराध नहीं है जब तक कि वे दूसरे धर्मों के लोगों को डराने या धमकाने के लिए उपयोग नहीं किए जाते। हालांकि, “गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा” नारा कुरान या अन्य मुस्लिम धार्मिक ग्रंथों में नहीं पाया जाता है, लेकिन फिर भी कई मुस्लिम लोग इसका उपयोग करते हैं बिना इसके सही अर्थ और प्रभाव को जाने।

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