महाराष्ट्र में नए सियासी उलटफेर के संकेत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस संग एनसीपी के दोनों धड़ों की गोपनीय बैठक से गरमाया राजनीतिक माहौल
प्राप्त विवरण के अनुसार, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास ‘सिल्वर ओक’ पर जाकर उनसे बेहद लंबी मंत्रणा की। इसके तुरंत बाद वे देर शाम सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करने पहुंचे। इस दौरान राजनीतिक तापमान तब और बढ़ गया जब सत्ताधारी एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल भी अलग से मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। हालांकि बैठक में शामिल किसी भी नेता या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस चर्चा के मुख्य एजेंडे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन दोनों ही गुटों के सूत्रों ने इस बात को स्वीकार किया है कि पर्दे के पीछे किसी बड़े राजनीतिक समझौते की पटकथा लिखी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई 2023 में पार्टी के विभाजन के बाद यह पहली बार है जब शरद पवार की पार्टी सबसे बड़े रणनीतिक संकट का सामना कर रही है। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो शरद पवार गुट के कुल 10 विधायकों में से कम से कम आधे से अधिक विधायक भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में शामिल होने के प्रबल पक्ष में हैं। लंबे समय तक विपक्षी खेमे में रहने के कारण इन विधायकों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आवश्यक विकास निधि जुटाने और प्रशासनिक मंजूरियां हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनके जमीनी राजनीतिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे।
पार्टी के प्रांतीय नेतृत्व ने हाल ही में अपने विधायकों की इस गंभीर भावना और चिंताओं से शीर्ष आलाकमान को विस्तार से अवगत कराया था। यद्यपि शरद पवार ने इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही पार्टी के अगले कदम को लेकर कोई सार्वजनिक घोषणा की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि वे अपने विधायकों के भारी दबाव के कारण इस नए विकल्प पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस साल की शुरुआत में मुंबई महानगरपालिका चुनावों के बाद से ही दोनों धड़ों के एक होने या शरद गुट के कांग्रेस में विलय की खबरें आती रही हैं, लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के कड़े विरोध के कारण अब बाजी पूरी तरह एनडीए की ओर मुड़ती हुई दिखाई दे रही है।
संख्या बल के रणनीतिक गणित को देखें तो विधानसभा में शरद पवार गुट के पास वर्तमान में 10 विधायक और लोकसभा में 8 सांसद मौजूद हैं। हालांकि यह महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक दलों में संख्या के हिसाब से छोटा समूह प्रतीत हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा नीत एनडीए के लिए इसकी उपयोगिता बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। केंद्र सरकार आगामी संसद सत्रों में सीमांकन विधेयक जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कानूनों को पारित कराने की योजना बना रही है, जिसके लिए उसे उच्च सदन और निम्न सदन दोनों में अतिरिक्त मतों की आवश्यकता है। ऐसे समय में एनडीए के शीर्ष रणनीतिकार शरद पवार गुट से मिलने वाले किसी भी संभावित वैधानिक समर्थन का खुले दिल से स्वागत करने के लिए तैयार दिख रहे हैं।
यह राजनीतिक उथल-पुथल सिर्फ शरद पवार खेमे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अजित पवार गुट के भीतर भी भारी अंतर्विरोध और मंथन का दौर जारी है। इस साल जनवरी के अंत में एक दुखद विमान हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद से राज्य की राजनीति का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। उनके निधन के बाद से दोनों गुटों के दोबारा एक होने की सुगबुगाहट तो तेज हुई थी, लेकिन नेतृत्व को लेकर बात नहीं बन सकी। अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर ही कानूनी आपत्तियां उठाई जा रही हैं, जिसने संगठन के आंतरिक असंतोष को उजागर कर दिया है। इन सभी बदलते हालातों के बीच दिल्ली से लेकर मुंबई तक की राजनीतिक नजरें अब शरद पवार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
